SECL के जामुना कोतमा क्षेत्र में तैनात डॉक्टर पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप, निजी प्रैक्टिस का मामला उजागर

कोतमा।साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के जामुना कोतमा क्षेत्र में पदस्थ एक चिकित्सक पर गंभीर प्रशासनिक और नैतिक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उक्त डॉक्टर पिछले लगभग सात महीनों से लगातार छुट्टी का सहारा लेकर अपने पूर्व पदस्थापन क्षेत्र सोहागपुर में दो से तीन स्थानों पर खुलेआम निजी प्रैक्टिस कर रहा है।

यह मामला केंद्र सरकार की CCS Conduct Rules, 1964 का स्पष्ट उल्लंघन बताया जा रहा है, जिसके तहत सरकारी सेवा में कार्यरत चिकित्सकों को ड्यूटी अवधि के दौरान निजी प्रैक्टिस करने की सख्त मनाही है।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित डॉक्टर ने जामुना कोतमा क्षेत्रीय अस्पताल में नियमित रूप से उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि छुट्टियों का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए सोहागपुर क्षेत्र में निजी क्लिनिकों और अस्पतालों में मरीजों का उपचार किया। स्थानीय निवासियों ने भी पुष्टि की है कि डॉक्टर वहां नियमित रूप से उपलब्ध रहते हैं।

जामुना कोतमा जैसे दूरस्थ और संवेदनशील कोयला क्षेत्रों में पहले से ही चिकित्सकों की भारी कमी है। ऐसे में इस तरह की लापरवाही से SECL की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा, जिससे कोयला मजदूरों और उनके परिवारों की जान जोखिम में पड़ रही है।

बताया गया है कि इस पूरे मामले की लिखित शिकायत नवंबर-दिसंबर 2025 में ही SECL बिलासपुर मुख्यालय, जामुना कोतमा क्षेत्रीय प्रबंधन तथा संबंधित चिकित्सा अधीक्षक को दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

एक शिकायतकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
"हमने कई बार पत्र लिखकर अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। सवाल यह है कि कोयला मजदूरों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?"

SECL की आधिकारिक नीतियों के अनुसार, इस प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर पहले कारण बताओ नोटिस, उसके बाद निलंबन और विभागीय जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है। उल्लेखनीय है कि SECL के स्वास्थ्य विभाग में 500 से अधिक डॉक्टर कार्यरत हैं, इसके बावजूद जामुना कोतमा और सोहागपुर जैसे क्षेत्रों में स्टाफ की कमी लंबे समय से बनी हुई है। पूर्व में भी इस तरह के मामलों में विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है।

यह प्रकरण SECL की स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता, आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कोयला मजदूरों और उनके परिजनों के लिए SECL के अस्पताल जीवनरेखा समान हैं, और ऐसी लापरवाही से संक्रामक रोगों या औद्योगिक दुर्घटनाओं के दौरान स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

स्थानीय कर्मचारियों और नागरिकों का कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर समय रहते निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे न केवल SECL की छवि को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि ईमानदार अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल भी कमजोर होगा।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोल इंडिया लिमिटेड और SECL प्रबंधन इस पूरे मामले पर कब संज्ञान लेता है और क्या दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जाती है, या यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह दबकर रह जाएगा।