शर्म को शर्म आ जाये पर ब्राम्हणों के ठेकेदार हुए गदगद,चुल्लू भर पानी मे डूब मरना चाहिये ब्राम्हणों के ठेकेदारों को - विजय उरमलिया की कलम से
शर्म को शर्म आ जाये पर ब्राम्हणों के ठेकेदार हुए गदगद,चुल्लू भर पानी मे डूब मरना चाहिये ब्राम्हणों के ठेकेदारों को - विजय उरमलिया की कलम से
अनूपपुर - हमारा समाज किस गर्त में जा रहा है जहाँ सत्ता धारी नेता किसी की बहन बेटियों को अपशब्द बोलते शर्मसार नही होते और मातृ शक्ति के लिए जिन शब्दों का स्तेमाल करते है उससे शर्म को भी शर्म आ जाती है पर इन नेताओं की बेशर्मी की हद तब और बढ़ जाती है जब पत्राचार के माध्यम से माफी मांगते है और ब्राम्हणों का ठेका लेने वाले ये ब्राम्हण संगठनों के नेता अपनी पीठ थपथपा कर मानो जग जीत लिया हो
दरसल भाजपा के नेता और विंध्य विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रह चुके अनिल गुप्ता ने भाजपा की महिला नेत्री एवं जैतहरी की पूर्व नगर परिषद की अध्यक्ष रही नवरत्नी शुक्ला को 28 अगस्त के दिन एक सार्वजनिक कार्यक्रम से माइक से भाजपा नेता अनिल गुप्ता ने कुलक्षणी,पिशाच जैसे अपशब्दों से संबोधित किया था और इस सफेद पोश नेता के इन अपशब्दों पर लोगों ने सरेआम तालियां बजाई पर बेहया हो चली राजनीति कहाँ किसी की माँ बहन और बेटी देखती है
इस पूरे घटना क्रम में एक सबसे दुःखद पहलू जो सामने आया था किसी और समाज की महिला को अगर इस भाजपा नेता ने इस तरह के शब्दों का स्तेमाल किया होता तो नेता जी को नाको चने चबाने पड जाते पर दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह रहा इस घटना का की भाजपा में मौजूद कुछ ब्राम्हण नेता ही पार्टी में अनिल गुप्ता की पैरवी करते नजर आये सूत्र बताते की यहां के कुछ ब्राम्हण नेता यहां से भोपाल तक अनिल गुप्ता की बेशर्मी से सिफारिश की
दूसरी तरफ जिले भर में ब्राम्हणों का ठेका लेने वाले कई संगठन बने जिसमे कुछ विप्र संगठन के नाम से तो कुछ ब्राम्हण संगठन के नाम से और आज तक इन संगठनों की आवाज उस बहन के लिए नही सुनाई दी और नवरत्नी शुक्ला के घर पर पहुंच कर साथ खड़े होने का दंभ भरने वाले ये संगठन आज उस पत्र पर अपनी पीठ थपथपा रहे है जिस पत्र में यह लिखा गया है कि मीडिया द्वारा मेरे बयान को प्रसारित किया गया जो मैं किसी के आहत करने के लिए नही बोला था और अगर किसी को उस बात से ठेस पहुंची है तो क्षमा चाहता हूं बजाइये ब्राम्हण समाज के ठेकेदारों ताली कोई भी आये माँ बहन को अपशब्द बोले और एक पत्र जारी कर माफी मांग ले और आप गदगद हो जाइये दुर्भाग्यपूर्ण तो यह है कि इस पत्र को लिखने में नेता जी को कई दिन लग गये जब माफी मांगनी ही थी तो सरे मंच से जैसे अभद्र टिप्पणी की थी उसी तरह सार्वजनिक मंच से या तो मीडिया के सामने आ कर माफी मांग लेते चुपचाप दबी जुबान पत्र लिख कर माफी मांग लेने से किसी महिला के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी माफी के लायक नही दुर्भाग्य तो यह है कि इस पत्र के आने से ब्राम्हणों के ठेकेदार बनने वाले इसको अपनी जीत मान कर पीठ थपथपा रहे है
भाजपा को चुनाव में भुगतने होंगे परिणाम
हमने उन गांव में रहने वाले शहरों में रहने वाले कुछ ब्राम्हण परिवारों से जब बात की तो उनके मन मे भाजपा के प्रति जो लगाव था बिखरा नजर आया और इस घटना ने उनको निर्णय करने की कगार पर ला खड़ा कर दिया लोगों ने कहां की आने वाले चुनाव में ब्राम्हण समाज भाजपा को तीनों विधानसभा में अपने मान सम्मान की ताकत भाजपा को दिखायेगा ब्राम्हणों का ठेका लेने वाले पत्र से खुश हो सकते है पर अनिल गुप्ता ने जिस तरह सार्वजनिक रूप से अपशब्द कहे है उसकी भरपाई भाजपा को अनूपपुर जिले में विधानसभा चुनाव में करना पड़ेगा और ऐसा नही है कि तीन में से दो विधान सभा कोतमा और अनूपपुर में ब्राम्हण समाज चुनाव के परिणामो में बहुत कुछ बदलने का माद्दा रखता है बहरहाल इस पूरे घटना क्रम में अनिल गुप्ता जैसे नेता को पत्राचार से माफी मांगनी पड़ी तो ब्राम्हण संगठन इसी पत्र से अपनी जीत का जश्न मनाने में डूबे हुए है


