शताब्दियों पुरानी परंपरा पर आघात: माता बिरासिनी मंदिर में दीवार पर अपमानजनक लेखन, पंडितों से पूजा-पाठ से पहले शुल्क वसूली,एसडीएम ने जांच की चेतावनी दी, दोषियों के विरुद्ध होगी दंडात्मक कार्रवाई; श्रद्धालु और ब्राह्मण समाज में आस्था पर चोट को लेकर गहरी नाराजगी,,रिपोर्ट@राजकुमार गौतम उमरिया
शताब्दियों पुरानी परंपरा पर आघात: माता बिरासिनी मंदिर में दीवार पर अपमानजनक लेखन, पंडितों से पूजा-पाठ से पहले शुल्क वसूली,एसडीएम ने जांच की चेतावनी दी, दोषियों के विरुद्ध होगी दंडात्मक कार्रवाई; श्रद्धालु और ब्राह्मण समाज में आस्था पर चोट को लेकर गहरी नाराजगी
पाली/उमरिया - माता बिरासिनी मंदिर में हाल ही में लगे एक नोटिस और दीवार पर अपमानजनक लेखन ने श्रद्धालुओं और पंडित समाज में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। कलश गृह के बाहर लिखा गया – “कृपया कलश विसर्जन की पर्ची पंडितों को न दें”। पंडित समाज ने इसे सार्वजनिक अपमान माना है और तुरंत हटाने की मांग की है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि कथा सुनने और पूजा कराने के लिए लोग मंदिर में आते हैं, और यह स्वाभाविक है कि ब्राह्मण ही इन धार्मिक कार्यों का संचालन करें। लेकिन अब मंदिर प्रबंधन ब्राह्मणों को पूजा कराने से पहले 1100 रुपये की रसीद कटवाने के लिए बाध्य कर रहा है। जो ब्राह्मण रसीद नहीं कटवाते, उन्हें मंदिर परिसर से बाहर कर दिया जाता है। इससे न केवल परंपरा पर आघात हुआ है, बल्कि आस्था से जुड़ी भावनाएँ भी आहत हुई हैं।
पूर्व मंदिर संचालन समिति सदस्य पंडित प्रकाश पालीवाल ने बताया कि मंदिर वर्ष 2012 से प्रशासनिक नियंत्रण में है। इससे पहले किसी पुरोहित से पूजा-पाठ कराने का पैसा नहीं लिया जाता था और न ही किसी विशेष वर्ग के विरुद्ध दीवार पर अपमानजनक टिप्पणी की जाती थी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से यह शुल्क वसूला जा रहा है, जो परंपरा और आस्था दोनों के खिलाफ है।
एसडीएम अम्बिकेश प्रताप सिंह ने कहा –
“दीवार पर यह जो लिखा गया है, वह पूर्णतः अनुचित है। मेरी अनुमति के बिना किसी ने ऐसा नहीं किया। दोषियों की पहचान कैमरों के माध्यम से करवाई जाएगी और उनके विरुद्ध उचित दंडात्मक कार्रवाई होगी।”
पाली नगर के ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि पंडित रामनारायण पांडे, पंडित प्रमोद उपाध्याय, आचार्य राकेश उपाध्याय और अन्य पुरोहितों ने भी कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है –
“यह सार्वजनिक रूप से पुरोहितों का अपमान है। नगर में विराजी माता के मंदिर में ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया। कुछ आवारा तत्व आस्था पर प्रहार कर नगर की सैकड़ों साल पुरानी छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर की व्यवस्थाएं भले ही प्रशासनिक नियंत्रण में हों, लेकिन कुछ चुनिंदा स्थानीय लोगों के इशारे पर संचालित हो रही हैं। शायद इन्हीं कारणों से लगातार विवाद सामने आ रहे हैं।
स्थानीय लोग और श्रद्धालु मांग कर रहे हैं कि घिनौने कृत्य करने वालों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी इस प्रकार की हरकत करने की हिम्मत न कर सके।
फिलहाल, मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर श्रद्धालुओं और पंडित समाज में गहरा रोष है और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की अपेक्षा की जा रही है, ताकि माता बिरासिनी मंदिर में आस्था और सम्मान की परंपरा अक्षुण्ण रह सके।


