गीता स्वाध्याय मंदिर में किया गया पूरे श्रावण मास में रुद्राभिषेक - स्वामी नर्मदानंद गिरी,,संवाददाता - श्रवण उपाध्याय
गीता स्वाध्याय मंदिर में किया गया पूरे श्रावण मास में रुद्राभिषेक - स्वामी नर्मदानंद गिरी,,संवाददाता - श्रवण उपाध्याय
अमरकंटक - मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में स्थित गीता स्वाध्याय आश्रम में श्रावण मास के गुरु पूर्णिमा के दिन से ही प्रारंभ आश्रम के मंदिर में स्थापित श्री ओंकारेश्वर महादेव का प्रतिदिन शोष्श पद्धति से रुद्राभिषेक व पूजन विधि विधान से कर पूरे सावन माह अभिषेक और पूजन चलता रहा ।
आश्रम के श्री महंत स्वामी नर्मदानंद गिरी जी महाराज ने बताया कि सावन महीना गुरुपूर्णिमा (आषाढ़ पूर्णिमा) से प्रारंभ होता है जिसे भगवान शंकर का पवित्र महीना माना जाता है । इस पूरे महीने में आचार्य पंडित आकाश द्विवेदी द्वारा रोजाना अभिषेक और पूजन को संपन्न करवाया गया है ।
सावन के अंतिम दिवस श्रावणी पर्व और रक्षाबंधन के पावन अवसर पर रुद्राभिषेक की पूर्णाहुति किया गया । हवन , पूजन आदि धार्मिक अनुष्ठान कर आश्रम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था , जिसमें संत-महात्मा , ब्राह्मण , भक्तगण और नगरवासी सभी बड़ी संख्या में उपस्थित हो कर बाबा भोलेनाथ के भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने के उपरांत आश्रम के संत स्वामी नर्मदानंद गिरी जी महाराज के द्वारा दक्षिणा भेंट कर सभी को कम्बल का वितरण किया गया ।
पंडित आकाश द्विवेदी ने बताया कि श्रावणी पर्व के अंतर्गत संतो और ब्राह्मणों ने परंपरागत पूजन कर विधि विधान से नदी या तालाब किनारे ब्राह्मण के आचार्यत्व पंडित धनेश द्विवेदी से सम्पन्न कराया जाता है । इस अवसर पर कर्मकांडी ब्राह्मणों ने मन, कर्म और वचन की शुद्धि हेतु श्रावणी पर्व मनाते है साथ ही जनेऊ परिवर्तन कर नया धारण करते है ।
अनेक शहरों से पधार मां नर्मदा उद्गम कुंड पर पुजारियों संग अन्य लोग तथा मृत्युंजय आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में नर्मदा तट रामघाट पर प्रकांड विद्वानों , आचार्यों , पुरोहितों , ब्राह्मणों , वेद पाठी बटुकों व अन्य लोगों के साथ पूरे विधि विधान पूर्वक संपन्न कर स्नान आदि बाद नया जनेऊ धारण कर श्रावणी पर्व धार्मिक , आध्यात्मिक आयोजन पूर्ण किया गया ।


