ऋतुराज की पदचाप, अमरकंटक में दिन की हल्की तपिश , संध्या की शीतलता,मार्च के आरंभ के साथ मौसम में संतुलित बदलाव , पर्यटकों को मिल रहा सुकून,,संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक - मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक जो विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमालाओं की गोद में बसी पावन नगरी अमरकंटक में मार्च के आगमन के साथ ऋतुराज वसंत की मृदुल आहट स्पष्ट महसूस होने लगी है । दिन के समय धूप अब पहले की अपेक्षा अधिक तीखी और स्वर्णिम प्रतीत हो रही है जबकि संध्या होते-होते पर्वतीय हवाओं की शीतलता वातावरण को फिर से ठंडा और सुखद बना देती है ।


बीते दो दिनों में तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि दर्ज की गई है । सोमवार 2 मार्च 2026 को नगर का अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया । दोपहर के समय धूप में हल्की गर्माहट महसूस हो रही है किंतु शाम ढलते ही पहाड़ियों से आने वाली ठंडी हवाएं मौसम को पुनः सुहावना बना देती हैं ।
नीले आकाश में तैरते बादल कभी-कभी धूप की तीव्रता को कम कर देते हैं जिससे प्रकाश और छाया का सुंदर दृश्य निर्मित होता है । इस संतुलित मौसम में अमरकंटक का प्राकृतिक परिवेश और अधिक मनोहारी दिखाई दे रहा है ।
पर्यटकों और श्रद्धालुओं को मिल रहा विशेष आनंद
देश के विभिन्न भागों—पुणे , नासिक , नागपुर और कोलकाता से आए पर्यटकों और श्रद्धालुओं ने बताया कि उनके शहरों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है जबकि अमरकंटक की हवा में अभी भी शीतलता बनी हुई है । बड़ी संख्या में पहुंचे नर्मदा परिक्रमावासी भी नर्मदा तट की शांति और पर्वतीय वातावरण में विशेष सुकून अनुभव कर रहे हैं।
प्रकृति का संतुलित स्वरूप बना आकर्षण का केंद्र
अमरकंटक में इस समय ऋतु परिवर्तन का यह क्रम प्रकृति के संतुलित और मनोहारी स्वरूप को दर्शाता है—जहाँ दिन हल्की गर्माहट लिए होता है और शाम शीतलता का स्पर्श देती है । यही सुहावना मौसम अमरकंटक को पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए निरंतर आकर्षण का केंद्र बनाए हुए है ।