अमरकंटक में रात्रिकालीन सड़कों पर गौमाता की समस्या,मुख्य मार्ग पर अज्ञात वाहनो की ठोकर से हुई मौतें ,,संवाददाता - श्रवण उपाध्याय 

अमरकंटक -  मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक जैसी धार्मिक और पर्यटन नगरी के लिए अत्यंत गंभीर विषय है । रात्रि कालीन समय पर गो माता और अन्य पशुओं का रात्रि कालीन मुख्य सड़कों पर बैठने न केवल यातायात के लिए बाधा है बल्कि दुर्घटनाओं का बड़ा कारण भी बन रहा है ।

रात्रि के समय बड़ी संख्या में गो माता और अन्य मवेशी सड़क पर बैठकर विश्राम करते हैं । इस कारण से वाहन चालकों को बार-बार दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है , जिसमें अनेक बेजुबान पशु घायल हो जाते हैं और कई बार उनकी मृत्यु भी हो जाती है , जो सोमवार रात्रि और मंगलवार प्रातः के बीच कपिलधारा मार्ग बांधा तिराहा पूर्व की घटना जताई जा रही है । नगर में देखा जा रहा है कि गो पालक अपने मवेशियों को घरों में बांधकर रखने के बजाय रातभर सड़कों पर छोड़ देते हैं । इससे न केवल दुर्घटनाएं होती हैं बल्कि नगर की स्वच्छता व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है । सुबह के समय नगर परिषद के सफाई कर्मियों को सड़कों पर फैले गोबर और गंदगी से जूझना पड़ता है ।

मां नर्मदा की उद्गम , पवित्र और धार्मिक नगरी अमरकंटक में यह समस्या वर्षों से बनी हुई है लेकिन नगर पालिका अथवा प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया । नगर परिषद द्वारा कभी कभी हांका लगवाकर पशुओं को नगर के प्रमुख मार्गो से हटाने का कर्तव्य निभा लेती है । समाज के धर्मप्रेमी और बुद्धिजीवी वर्ग को भी इस विषय पर जागरूकता फैलाने और गो पालकों को जिम्मेदार बनाने के प्रयास करने चाहिए । अमरकंटक नगर के लोगों ने कुछ आवश्यक सुझाव दिए है कि - मवेशियों को घरों में बांधकर रखने की सख्त हिदायत दी जाए । नियम तोड़ने वाले गो पालकों पर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई की जाना चाहिए , नगर परिषद रात्रिकालीन गश्त लगाकर सड़कों पर खुले मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए , समाजसेवी और धार्मिक संस्थाएं गोसेवा के नाम पर जिम्मेदारी का भाव जगाएं । 
यदि इस पर समय रहते ध्यान न दिया गया तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है ।