अमरकंटक में मालवा अंचल के श्रद्धालु कर रहे कुलदेवी-देवताओं व अस्त्र-शस्त्र की पूजा,रामघाट तट पर भजन-कीर्तन , दीप प्रज्वलन और पारंपरिक अनुष्ठानों का क्रम जारी,,रिपोर्ट - श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट
अमरकंटक में मालवा अंचल के श्रद्धालु कर रहे कुलदेवी-देवताओं व अस्त्र-शस्त्र की पूजा,रामघाट तट पर भजन-कीर्तन , दीप प्रज्वलन और पारंपरिक अनुष्ठानों का क्रम जारी,,रिपोर्ट - श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट

अमरकंटक - मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक के धार्मिक एवं आध्यात्मिक आस्था की पावन नगरी में इन दिनों मालवा अंचल से बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त श्रद्धालु अपने कुलदेवी-देवताओं तथा उनके अस्त्र-शस्त्रों की पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं । पतित पावनी मां नर्मदा के पावन तट रामघाट के उत्तर एवं दक्षिण तट पर मालवा क्षेत्र से आए श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ में लीन दिखाई दे रहे हैं ।

सायंकाल श्रद्धालु नर्मदा तट रामघाट पर अपने कुलदेवी-देवताओं तथा उनके प्रतीकात्मक अस्त्र-शस्त्रों की स्थापना कर दीप प्रज्वलित करते हैं और भक्ति भाव से भजन-कीर्तन करते हैं । इसके बाद प्रातःकाल पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के साथ मां नर्मदा में स्नान-डुबकी लगाकर विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है तथा अपने आराध्य देवी-देवताओं से मनोकामनाएं और मन्नतें मांगी जाती हैं । यह धार्मिक अनुष्ठान सायंकाल से प्रारंभ होकर दोपहर तक निरंतर चलता रहता है ।
पारंपरिक भोजन और सामूहिक भक्ति का माहौल
इस अवसर पर श्रद्धालु अपने पारंपरिक व्यंजन जैसे लिट्टी-चोखा और दाल-बाटी बनाकर सामूहिक रूप से भोजन भी करते हैं । रामघाट तट पर पूजा-अर्चना के दौरान कई श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते-नाचते भी दिखाई देते हैं । भक्ति भाव के वातावरण में कई श्रद्धालु अपने आराध्य के प्रति गहरी आस्था व्यक्त करते हुए उनसे जुड़े प्रश्नों के समाधान भी प्राप्त करते देखे गए ।
मालवा के कई जिलों से पहुंच रहे श्रद्धालु
उल्लेखनीय है कि उज्जैन , रायसेन , देवास , रतलाम , धार और सीहोर सहित मालवा क्षेत्र के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु अमरकंटक पहुंच रहे हैं । यह धार्मिक अनुष्ठान चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी से प्रारंभ होकर चौदस तिथि तक अनवरत चलता रहेगा ।
मालवांचल के श्रद्धालुओं द्वारा कुलदेवी-देवताओं तथा उनके अस्त्र-शस्त्रों की यह पूजा प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि के पूर्व की जाती है । श्रद्धालुओं का मानना है कि इस पूजा-अर्चना से धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है तथा जीवन में नई शक्ति और सकारात्मक चेतना प्राप्त होती है ।
विगत दिवस उज्जैन क्षेत्र से लगभग 10 बसों में सवार होकर बड़ी संख्या में पुरुष , महिलाएं , युवक-युवतियां अमरकंटक पहुंचे और मां नर्मदा के पावन तट पर श्रद्धा-भक्ति के साथ अपने कुलदेवी-देवताओं की आराधना की ।


