पशु क्रूरता पर जैतहरी पुलिस की कार्रवाई या कई सवालों को जन्म देती कहानी?

तीन पिकअप जब्त, तीनों चालक फरार बताए गए; एक व्यक्ति गिरफ्त में, कार्रवाई को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल

जैतहरी, अनूपपुर। पशु क्रूरता के मामले में जैतहरी पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई अब खुद कई सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। पुलिस ने 03 पिकअप वाहनों में कथित रूप से क्रूरतापूर्वक मवेशियों को ले जाने की सूचना पर कार्रवाई करते हुए तीनों वाहनों को जब्त किया है। पुलिस के मुताबिक कार्रवाई के दौरान तीनों पिकअप के चालक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए, जबकि एक व्यक्ति को पीछा कर पकड़े जाने की बात कही गई है।

पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार 03 सितंबर 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि तीन पिकअप वाहनों में मवेशियों को ठूंस-ठूंसकर और क्रूरतापूर्वक बांधकर छत्तीसगढ़ की ओर से सिवनी-मुण्डा मार्ग होते हुए ले जाया जा रहा है। सूचना के बाद जैतहरी थाना एवं पुलिस सहायता केन्द्र वेंकटनगर की तीन टीमों द्वारा नाकाबंदी की गई।

पुलिस का दावा है कि नाकाबंदी के दौरान तीनों पिकअप वाहन तेज रफ्तार में पहुंचे और रुकने का संकेत देने के बावजूद चालकों ने वाहन नहीं रोके। पीछा किए जाने पर तीनों चालक अपने वाहन छोड़कर फरार हो गए।

तीन वाहन पकड़े, लेकिन तीनों चालक कैसे निकल गए?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पुलिस ने पहले से सूचना के आधार पर तीन टीमों के साथ नाकाबंदी की थी और वाहनों को रोकने की कार्रवाई की जा रही थी, तो तीनों वाहनों के चालक पुलिस की मौजूदगी में वाहन छोड़कर फरार कैसे हो गए?

पुलिस की घेराबंदी और कार्रवाई की रणनीति को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि पुलिस को पहले से वाहनों की जानकारी थी और मार्ग पर नाकाबंदी की गई थी, तो क्या आरोपियों को पकड़ने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे? क्या मौके पर लगे कैमरों या अन्य तकनीकी माध्यमों से फरार चालकों की पहचान की जा रही है?

20 मवेशी बरामद, एक भैंस मृत बताई गई

पुलिस के अनुसार एक पिकअप में 07, दूसरी में 06 तथा तीसरी पिकअप में 07 मवेशी मिले। इनमें दूसरी पिकअप में एक भैंस मृत अवस्था में मिली। पुलिस का कहना है कि मवेशियों को रस्सियों से बांधकर अत्यंत क्रूरतापूर्वक ठूंस-ठूंसकर रखा गया था तथा उनके लिए चारा-पानी की व्यवस्था नहीं थी।

वहीं, पुलिस द्वारा एक व्यक्ति आसीफ कुरैशी पिता हसनैन कुरैशी, उम्र 26 वर्ष, निवासी जेकेडी झगड़ाखान, मनेन्द्रगढ़, छत्तीसगढ़ को पीछा कर पकड़े जाने की जानकारी दी गई है। उसके विरुद्ध संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू किए जाने की बात पुलिस ने कही है।

कार्रवाई बड़ी, लेकिन फरार चालकों पर सवाल बरकरार

पुलिस ने तीन पिकअप वाहन और कुल 20 मवेशी जब्त किए हैं। जब्त संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब 21 लाख 20 हजार रुपये बताई गई है। इसमें तीन पिकअप वाहनों की कीमत करीब 17 लाख रुपये और मवेशियों की कीमत करीब 4 लाख 20 हजार रुपये बताई गई है।

लेकिन इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद तीनों पिकअप के चालकों का मौके से फरार हो जाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। क्या पुलिस ने चालकों को पकड़ने के लिए पर्याप्त घेराबंदी की थी? क्या फरार आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए अलग टीम बनाई गई है? क्या इस पूरे नेटवर्क में केवल वाहन चालक ही शामिल थे या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है?

क्या सिर्फ वाहन जब्त करना ही पर्याप्त है?

मवेशियों की कथित तस्करी और पशु क्रूरता जैसे गंभीर मामले में केवल वाहन और मवेशियों की जब्ती के बाद कार्रवाई समाप्त नहीं होनी चाहिए। पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि इन वाहनों के मालिक कौन हैं, मवेशियों को कहां से लाया गया था, कहां ले जाया जा रहा था और इस पूरे परिवहन के पीछे कौन लोग हैं।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि तीनों चालक फरार क्यों हो गए और उन्हें पकड़ने में पुलिस अब तक सफल क्यों नहीं हुई?

जैतहरी पुलिस की कार्रवाई को लेकर अब लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं और सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन सवालों का वास्तविक जवाब पुलिस की विस्तृत जांच और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल तीन पिकअप वाहनों की जब्ती और 20 मवेशियों की बरामदगी पुलिस की कार्रवाई का हिस्सा है, लेकिन तीनों चालकों के फरार होने की घटना ने इस पूरी कार्रवाई की निगरानी, घेराबंदी और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।