पाली में भव्य कलश यात्रा सफल, लेकिन 25 जनवरी के सम्मेलन से पहले सियासी खींचतान उजागर

 


पाली - सकल हिन्दू समाज के तत्वावधान में रविवार 18 जनवरी 2026 को नगर पाली में भव्य कलश यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। साईं मंदिर, बिरसिंहपुर पाली से प्रारंभ हुई यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पूरे धार्मिक उत्साह और सनातन चेतना के संदेश के साथ संपन्न हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मातृशक्ति एवं सनातन संस्कृति से जुड़े लोग इसमें शामिल हुए।


हालांकि, इस सफल आयोजन के पीछे एक ऐसा सच भी सामने आया है जिसने नगर की राजनीति और सत्ताधारी दल के भीतर के अंतर्विरोधों को उजागर कर दिया है।
दरअसल, इसी आयोजन की अगली कड़ी के रूप में 25 जनवरी 2026 को विशाल हिन्दू सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं भंडारे का आयोजन प्रस्तावित है। इसके लिए नगर के निर्माणाधीन नए बस स्टैंड परिसर का चयन किया गया था, जो लगभग पूर्ण अवस्था में है और जिसका केवल उद्घाटन शेष है। आयोजकों द्वारा नगर पालिका परिषद पाली की अध्यक्ष शकुंतला प्रधान से बस स्टैंड परिसर के सामने वाले प्रांगण, जहां बसों का ठहराव होना है, में कार्यक्रम की अनुमति मांगी गई।
बताया जाता है कि अध्यक्ष शकुंतला प्रधान ने यह कहते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया कि बस स्टैंड का अभी उद्घाटन नहीं हुआ है, इसलिए वहां किसी भी प्रकार के आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह जवाब उस समय और भी चौंकाने वाला माना गया, जब आयोजन किसी निजी संस्था का नहीं, बल्कि सकल हिन्दू समाज जैसे व्यापक हिन्दू संगठन का था।
मामला यहीं नहीं रुका। जब यह बात संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंची तो प्रांत स्तर के पदाधिकारियों एवं स्थानीय विधायक मीना सिंह के हस्तक्षेप के बाद नगर पालिका अध्यक्ष को न चाहते हुए भी मौखिक रूप से उसी स्थान पर आयोजन की अनुमति देनी पड़ी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जिस नगर पालिका परिषद में भाजपा का ही कब्जा है, अध्यक्ष स्वयं भाजपा से हैं और नगर में भाजपा के 8 पार्षद मौजूद हैं, फिर भी इतने बड़े हिन्दू एकता के आयोजन में न तो प्रारंभिक सहयोग दिखा और न ही एक भी पार्षद कार्यक्रम में नजर आया।
क्या यह केवल “उद्घाटन नहीं हुआ” का तकनीकी बहाना था, या इसके पीछे कोई राजनीतिक खींचतान, गुटबाजी या व्यक्तिगत अहंकार काम कर रहा था?
क्या हिन्दू एकता और सनातन संस्कृति की बात करने वाली सत्ताधारी पार्टी के भीतर ही ऐसे आयोजनों को लेकर असहजता है?
और यदि विधायक के हस्तक्षेप के बाद ही अनुमति मिलती है, तो नगर पालिका अध्यक्ष की स्वायत्त भूमिका पर भी सवाल उठना लाजिमी है।
कलश यात्रा की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि नगर की जनता ऐसे आयोजनों के साथ खड़ी है, लेकिन 25 जनवरी को होने वाले विशाल हिन्दू सम्मेलन से पहले जो घटनाक्रम सामने आया है, उसने भाजपा की कथनी और करनी के बीच के अंतर पर एक जोरदार तमाचा जरूर जड़ दिया है।
अब देखना यह होगा कि 25 जनवरी को होने वाले सम्मेलन में वही जनप्रतिनिधि और पार्षद नजर आते हैं या फिर हिन्दू समाज को एक बार फिर यह साफ देखने को मिलेगा कि यह पूरा आयोजन जनसमर्थन से सफल हो रहा है, न कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से।