आखिर अरविंद राय पर क्यों लग रहे जप्त गांजा बेचने का आरोप पुलिस की शाख पर बट्टा लगाते ऐसे पुलिस कर्मी 
अनूपपुर - थाना भालूमाड़ा में पदस्थ एएसआई अरविंद राय एक बार फिर सुर्खियों में है हमारे सूत्रों की माने तो सबसे बड़ी बात तो यह है कि अरविंद राय न तो पुलिस की गणना में कई बार शामिल होता है और पूरे थाने को यह कहते हुए धौंस जमाता है कि मैं पुलिस अधीक्षक का खास हूँ अगर ऐसा है तो पुलिस अधीक्षक को प्रेस वार्ता कर सब को बता देना चाहिए कि अरविंद राय अनूपपुर पुलिस का कर्मचारी नही है बल्कि पुलिस अधीक्षक का खास है दरसल हमारे सूत्रों की माने तो अरविंद राय तब सुर्खियों में एक बार फिर आये जब 25 मार्च की शाम को पुलिस को खबर लगी कि शिकारपुर क्षेत्र में गांजा की तस्करी हो रही है खबर लगते ही एएसआई अरविंद राय सहित एक और एएसआई समेत एक आरक्षक मौके पर पहुंचते है और पुलिस की भनक लगते ही तस्कर गांजा फेंक भाग खड़े हुये और फिर इन साहबानो का खेल शुरू हुआ हमारे सूत्र बताते है 80 किलो जप्त गांजा ये थाने के रिकॉर्ड में जप्त नही अरविंद राय की फाइल में जप्त किया गया जिसको इन पुलिस कर्मियों ने बेंच डाला सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह गांजा रामपुर के किसी सोनी तस्कर का था और अरविंद राय अपनी अभिरक्षा में जप्त करने के बाद 80 किलो गांजा को इन पुलिस कर्मियों ने जायसवाल को पांच लाख में देने का फैसला किया पर सौदा 4 लाख के आस पास में जा कर सेटल हुआ |
अब सवाल यह उठता है कि अगर पुलिस खुद गांजा तस्कर बन जाये तो जिले में शराब गांजा माफ़ियाओं की जरूरत क्या है,और इन सब मे।सबसे दुर्भाग्य जनक तस्वीर यह है कि थाना प्रभारी संजय खलोक जैसे व्यक्ति को इन पुलिस कर्मियों से क्या उम्मीद की ये ईमानदारी से काम करेंगे जबकि संजय खलको का रिकॉर्ड अब तक साफ सुथरा रहा है पर ऐसे पुलिस कर्मियों की वजह से थाना प्रभारी से लेकर पुलिस अधीक्षक तक कि किरकिरी होती है अब तो लोगों में जन चर्चा यह बन रही हैं कि अपने आप को पुलिस अधीक्षक का खास कहने वाले ये साहब अरविंद राय और उनके साथ इस वारदात में शामिल पुलिस कर्मियों के खिलाफ अब पुलिस अधीक्षक को गांजा तस्करी का मामला पंजीबद्ध कराते हुए कड़ी से कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि पुलिस कर्मियों के लिए ये कार्यवाही एक मिशाल साबित हो सके,और अगर समय रहते इन बेलगाम हो चले पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही नही होती तो समझ लीजिए कि अरविंद राय जैसा पुलिस कर्मी जिले  में माफ़ियायों का सरदार कब बन जायेगा पुलिस को भी भनक नही लगेगी,सूत्र बताते है कि जब से यह मामला सुर्खियों में आया है इन साहबानो के होश पाख्ता हो चले है वैसे भी अरविंद राय जिन जिन थानों में रहे उन पर बराबर माफ़ियाओं को संरक्षण देने का आरोप काले कारोबारों को संचालित करने के आरोप अंदर खाने में लगते रहे है पर इन साहब के रसूख के चलते कोई भी कुछ बोलने से डरता रहा अब ये मामला जन चर्चा में आने से इतने बड़े मामले का खुलासा हुआ अन्यथा अन्य मामलों की तरह साहब इसको भी पचा जाते, बहरहाल देखना लाजमी होगा कि आखिर इन पर कार्यवाही कब तक होती है