उमरिया में प्रभारी मंत्री का प्रवास: सवाल बहुत थे, जवाब शून्य,जिले के ज्वलंत मुद्दों पर पत्रकारों के सवालों का नहीं मिला कोई ठोस जवाब, प्रेस वार्ता बनकर रह गई औपचारिक रस्म

उमरिया - जिले के एकदिवसीय प्रवास पर पहुंचे प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान ने तय कार्यक्रम के अनुसार पत्रकार वार्ता की, लेकिन यह वार्ता जनता और जिले से जुड़े सवालों के समाधान के बजाय केवल औपचारिकता निभाने तक ही सीमित नजर आई।

पत्रकार वार्ता में जिले के लगभग सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकार मौजूद रहे। पत्रकारों ने अपने-अपने स्तर पर उमरिया जिले से जुड़े गंभीर और ज्वलंत मुद्दों को उठाया, लेकिन इन सवालों के जवाब देने में मंत्री जी पूरी तरह मौन ही नजर आए।

पत्रकार वार्ता की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के “दो साल—बेमिशाल” कार्यकाल की उपलब्धियों के बखान से हुई। मंत्री जी ने सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों पर लंबा वक्तव्य दिया, लेकिन जैसे ही पत्रकारों ने जिले की वास्तविक समस्याओं पर सवाल किए, वार्ता का रुख बदल गया।

हैरानी की बात यह रही कि किसी भी सवाल पर न तो कोई ठोस प्रतिक्रिया दी गई और न ही भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन। सवाल पूछे गए, कैमरे चलते रहे, माइक ऑन रहे—लेकिन जवाब अधूरे या पूरी तरह अनुपस्थित रहे।

कुल मिलाकर प्रभारी मंत्री की यह पत्रकार वार्ता जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरती नजर नहीं आई। यह वार्ता सवालों के समाधान के बजाय कोरम पूरा करने की रस्म अधिक लगी, जिसमें जिले की समस्याएं एक बार फिर फाइलों, भाषणों और औपचारिक बयानों के बीच दबकर रह गईं।