फर्जी बाडे का गढ़ बनते जा रहा वन परिक्षेत्र कार्यालय बिजुरी, फर्जी टीपी हुई उजागर कौन है मास्टर माइंड वाहन मालिक और वनोपज जांच नाका प्रभारी वन परिक्षेत्र बिजुरी का वायरल आॅडियो कर रहा खुलासा

फर्जी बाडे का गढ़ बनते जा रहा वन परिक्षेत्र कार्यालय बिजुरी, फर्जी टीपी हुई उजागर कौन है मास्टर माइंड
वाहन मालिक और वनोपज जांच नाका प्रभारी वन परिक्षेत्र बिजुरी का वायरल आॅडियो कर रहा खुलासा
इन्ट्रो- वन परिक्षेत्र बिजुरी अंतर्गत वनोपज जांच नाका रामनगर प्रभारी पीएल वन वासी के हस्ताक्षर से 28 दिसम्बर 2023 को वाहन क्रमांक एमपी 18 जीए 2885 से नील गिरी के कटे हुए पेड़ों के परिवहन हेतु रामनगर से ओरियंट पेपर मिल अमलाई के लिए एक टीपी जारी की गई जिसकी वैधता 30 दिसम्बर 2023 तक थी। वाहन चालक जब उक्त टीपी के जरिए नीलगिरी के कटे पेडों को लेकर गनतव्य के लिए निकला तो 28 दिसम्बर की रात ही वन परिक्षेत्र कोतमा के स्टाफ के द्वारा वाहन को रोक उसकी जांच की गई जिसमें चालक के द्वारा जब उन्हें टीपी दिखाई गई तो वह टीपी स्टाफ ने फर्जी पाई और वाहन को कैम्पस में खड़ा करा लिया गया। आनन-फानन में 29 दिसम्बर 2023 को बिना फर्जी टीपी की जांच पूर्ण हुए वनपाल वनोपज जांच नाका रामनगर प्रभारी पीएल वनवासी को वन मण्डलाधिकारी द्वारा निलंबित कर दिया गया। लेकिन फर्जी टीपी जारी करने वाले मास्टर माइंड पर अब तक कोई कार्यवाही नही की गई। सूत्र बताते है कि 4 जनवरी को सही टीपी उपवन क्षेत्रपाल षिवपाल सिंह मार्को से जारी कराकर वाहन को छोड़ा गया।
बिजुरी/अनूपपुर। वन मण्डल अनूपपुर के वन परिक्षेत्र बिजुरी में जो भी कारनामें हो जाए वह कम है और उन्हें उच्चाधिकारियों का पुरा अभय दान है तभी तो एक नही कई कारनामें प्रमाणित तौर पर सामने आने के बाद भी जिम्मेदार परिक्षेत्राधिकारी के विरूद्ध वन मण्डलाधिकारी की कलम तक नही चलती फर्जी टीपी का मामला अपराध की श्रेणी में आता है लेकिन उसके बावजूद इसकी जांच न होना चोर-चोर मौसेरे भई वाली कहावत को चरितार्थ करता है। सूत्र बताते है कि वनोपज जांच नाका रामनगर प्रभारी पीएल वनवासी द्वारा वाहन क्रमांक एमपी 18 जीए 2885 से नीलगिरी के कटे हुए पेड़ों के परिवहन हेतु वन परिक्षेत्र बिजुरी रेंजर के रीडर लिपिक संजय शुक्ला से बात-चीत कर टीपी की मूल प्रति की छाया प्रति के माध्यम से जारी की गई इसका खुलासा सोषल मीडिया में वाहन मालिक और वनोपज जांच नाका प्रभारी वन परिक्षेत्र बिजुरी का वायरल आडियों कर रहा है। इसकी सच्चाई का पता तो जिम्मेदार अधिकारियों को लगाना चाहिए लेकिन बात-चीत का वायरल आडियों स्पष्ट कर रहा है कि वन परिक्षेत्र बिजुरी फर्जीबाडे की खान बनता जा रहा है। समय रहते यदि इस वायरल आडियों के जरिये अन्य मामलों की तह तक अधिकारी नही पहुंचे तो यहां शासन के राजस्व को बेखौफ होकर क्षति पहुंचाई जाती रहेगी।
आखिर मामले से रेंजर कैसे है अंजान
नीलगिरी के पेड़ों के परिवहन हेतु जारी टीपी को किसी और ने नही बल्कि वन विभाग के ही जिम्मेदारों ने फर्जी पाया है। ऐसे में वन परिक्षेत्र कार्यालय बिजुरी में पदस्थ रेंजर मामले से कैसे अंजान है समझ के पारे है बहरहाल यह विभाग के अधिकारियों के समझने का अपना विषय है कि वह कब तक यहां फर्जीबाड़ा कराते है। सूत्र बताते है कि यह एक महज बानगी है जो सामने आई है। छत्तीसगढ़ से लकड़ियों को लेकर आने वाले वाहनो कि जांच सघनता सक की जाए तो कई बड़े खुलासे होगें। इसके अलावा वन परिक्षेत्र बिजुरी की सीमा के अंदर लकडियों की अवैध कटाई व वन भूमि से खनिज, रेत, पत्थर का अवैध उत्खनन व परिवहन माफिया बगैर अधिकारी की सांठ-गांठ के नही कर सकते।
क्या है वायरल आडियो का सच
नीलगिरी के कटे हुए पेड़ों का ओरिएंट पेपर मिल अमलाई तक वाहन से परिवहन के दौरान पकडे जाने पर वाहन मालिक एवं वनोपज जांच नाका रामनगर प्रभारी पीएल वन वासी के बीच हुई बातचीत में साफ शब्द है कि फर्जी टीपी संजू शुक्ला के कहने पर जारी की गई थी लेकिन वन मण्डलाधिकारी के द्वारा संजू शुक्ला के विरूद्ध कार्यवाही क्यों नही की गई। क्या इसलिए कि संजू शुक्ला वन परिक्षेत्राधिकारी बिजुरी कार्यालय का रीडर लिपिक है या फिर वह रसूकदार है या फिर अधिकारी उसके साथ ऐसे फर्जीबाडे के कामो में अपनी भूमिका निभाते है यह सवाल जवाब तो मांगते है। सूत्र बताते है कि उक्त रीडर लिपिक संजय शुक्ला के मामले कि जांच की जाए तो कई चौंकाने वाले कारनामे सामने आएँगे जिसको देखकर जिम्मेदार खुद अचंभित हो सकते है लेकिन यह सब कुछ उन्ही जिम्मेदार अधिकारियों की कलम से होना है।
शासन के राजस्व की क्षति का जिम्मेदार कौन?
ऐसे मामलों से मध्यप्रदेश शासन को जानकार सूत्रों की मानें तो प्रति माह लाखो रुपये की क्षति होती है ऐसे में इसका जिम्मेदार कौन यह तो विभाग के अधिकारी ही बता सकते है। फर्जी टीपी के मामले में एक बात तो साफ कर दी है कि इस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के बाद विभिन्न स्थानों तक उसके परिवहन के लिए जारी की जाने वाली टीपी में लेन-देन का हिस्सा हर एक जिम्मदार अधिकारी तक पहुंचता है। सामने आ रहे लगातार ऐसे मामलो के बाद यदि यह कहा जाए कि वन परिक्षेत्र बिजुरी अंतर्गत जंगल राज कायम है तो कोई अतिसंयोक्ति नही होगी।