एकलव्य विद्यालय पाली छात्रावास से दो छात्राएं लापता,पाली विकासखंड की महीने भर में दूसरी घटना; पहले मामला नेताजी सुभाषचंद्र बोस छात्रावास से – अधीक्षक व प्राचार्य की जवाबदेही पर सवाल

पाली (उमरिया) - पाली स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के छात्रावास से दो छात्राएं लापता हो गई हैं। ये छात्राएं कक्षा 11वीं और 12वीं की छात्राएं थीं और क्रमशः ग्राम बरबसपुर और ग्राम मढवाटोला की रहने वाली हैं। यह घटना पाली विकासखंड की महीने भर में दूसरी बार सामने आई है।

उल्लेखनीय है कि पहले मामला भी पाली के ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस छात्रावास से हुआ था, जब तीन छात्राएं कुछ समय के लिए गायब हुई थीं। उस समय पाली पुलिस ने तेजी दिखाते हुए इन तीनों छात्राओं को महज कुछ ही घंटों में मैहर से बरामद कर लिया था।

लगातार घट रही इन घटनाओं ने विद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। अभिभावक और स्थानीय लोग आशंका जता रहे हैं कि यदि छात्रावास में बार-बार छात्राएं लापता हो रही हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अधीक्षक व प्राचार्य पर होगी।

सरकार की संवेदनशीलता और सुरक्षा नीति
सरकार ने विशेष रूप से आदिवासी छात्र-छात्राओं, खासकर लड़कियों की सुरक्षा और कल्याण पर ध्यान देने की नीति बनाई है। शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, आदिवासी छात्राओं के लिए छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था, नियमित निगरानी और समय पर चेतावनी प्रणाली लागू करने का आदेश जारी किया गया है।

एसडीओ पी की जांच में व्यवधान
जाँच के लिए एसडीओ पी विद्यालय पहुंचे। लेकिन जांच के दौरान विद्यालय में पदस्थ शिक्षिका उषा राजपूत ने अधिकारियों को सीधे छात्राओं से पूछताछ करने से रोक दिया और उन्हें अंदर भेज दिया।

प्राचार्य का बयान
प्राचार्य तेन सिंह ने कहा— “कल मैं विद्यालय से बाहर गया था और मेरी मौजूदगी में प्रभार उषा राजपूत को सौंप दिया गया था। लेकिन उसी दिन शाम को मैं वापस आ गया था।”


इसके बाद घटनाक्रम पर ध्यान देते हुए कहा जा सकता है कि शायद उषा राजपूत पुलिस जांच के दौरान इसलिए बिलबिला उठीं क्योंकि उन्हें लगा कि कहीं इस घटना की गाज मुझ पर तो नहीं गिरेगी। इसे कहावत में कहा जाता है— “खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे।”

कलेक्टर का बयान
इस मामले में कलेक्टर धरनेंद्र जैन ने कहा—
“मामले की जांच कर संबंधित के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी।”

स्थानीय नागरिक और अभिभावक इस घटना से गंभीर रूप से चिंतित हैं। उनका कहना है—
“सरकार आदिवासी छात्रों की सुरक्षा को गंभीरता से लेती है, लेकिन लगातार छात्राओं के लापता होने और जांच में व्यवधान डालने की घटनाओं से स्पष्ट होता है कि स्कूल प्रबंधन पूरी तरह जवाबदेह नहीं है।”

जिला प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
हालांकि जिला प्रशासन इस घटना के लिए सीधे मौके पर नहीं पहुँचा, लेकिन स्थानीय लोग मानते हैं कि एसडीओ पी की जांच पर्याप्त नहीं है। पुलिस और शिक्षा विभाग को निर्देश दिए जाने चाहिए कि छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।