बालाघाट कलेक्टर का तुगलकी फरमान? अस्पताल, स्कूल और सरकारी दफ्तरों में फोटो-वीडियो पर रोक से उठे सवाल
बालाघाट कलेक्टर का तुगलकी फरमान? अस्पताल, स्कूल और सरकारी दफ्तरों में फोटो-वीडियो पर रोक से उठे सवाल
बिना अनुमति फोटो, वीडियो और रील बनाने पर प्रतिबंध, आदेश से आमजन और पत्रकारों के अधिकारों को लेकर बढ़ी चिंता
बालाघाट। बालाघाट जिला प्रशासन द्वारा अस्पतालों, स्कूलों और शासकीय कार्यालयों में बिना अनुमति फोटो-वीडियो बनाने तथा रील तैयार करने पर प्रतिबंध लगाए जाने के आदेश के बाद अब इस फैसले को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश में संबंधित संस्थानों में बिना अनुमति फोटो-वीडियोग्राफी किए जाने पर रोक की बात कही गई है।
प्रशासन का तर्क व्यवस्था और संस्थानों की गरिमा बनाए रखने से जुड़ा हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस तरह का व्यापक प्रतिबंध आम नागरिकों और पत्रकारों के सूचना एवं अभिव्यक्ति से जुड़े अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा?
अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और शासकीय कार्यालयों में आम जनता के कामकाज से जुड़ी समस्याएं सार्वजनिक हित के महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे में यदि किसी नागरिक या पत्रकार को किसी कथित अव्यवस्था, लापरवाही या जनसमस्या का फोटो अथवा वीडियो प्रमाण के रूप में दर्ज करना हो, तो क्या हर स्थिति में पूर्व अनुमति लेना व्यावहारिक होगा?
जनता पूछ रही—शिकायत का सबूत कैसे जुटाएगी?
यदि किसी सरकारी कार्यालय में कर्मचारी की अनुपस्थिति, अस्पताल में अव्यवस्था या किसी सार्वजनिक संस्था में गंभीर समस्या सामने आती है, तो उसका फोटो-वीडियो अक्सर शिकायत का महत्वपूर्ण आधार बनता है। प्रतिबंध के बाद आम नागरिकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि बिना फोटो-वीडियो के वह अपनी शिकायत को प्रमाणित कैसे करेगा?
पत्रकारिता पर भी असर पड़ने की आशंका
पत्रकारों के लिए घटनास्थल की तस्वीर और वीडियो समाचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ऐसे में अनुमति की अनिवार्यता से स्वतंत्र और त्वरित रिपोर्टिंग प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मरीजों की निजता, बच्चों की सुरक्षा और संवेदनशील स्थानों की गोपनीयता की रक्षा के लिए उचित नियम होना जरूरी है, लेकिन सार्वजनिक हित की पत्रकारिता और सामान्य नागरिक की शिकायत के बीच संतुलन बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
फरमान पर पुनर्विचार की मांग
कलेक्टर के इस आदेश को लेकर अब यह मांग उठ रही है कि प्रशासन स्पष्ट करे कि प्रतिबंध किन परिस्थितियों में लागू होगा और पत्रकारों तथा आम नागरिकों के जनहित से जुड़े फोटो-वीडियो बनाने के अधिकारों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी।
व्यवस्था के नाम पर नियम जरूरी हैं, लेकिन सवाल यह है कि नियम जनता की सुविधा के लिए हैं या जनता की आवाज को सीमित करने के लिए? बालाघाट प्रशासन को इस आदेश के उद्देश्य, दायरे और आमजन के अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर स्पष्टता देना चाहिए।


