₹7 लाख के फिनायल के बाद अब ₹7.80 लाख का ‘नॉन एंटी सेट-ऑफ स्प्रे पाउडर,खरीदी हो गई, भुगतान हो गया… लेकिन किसी को नहीं पता ‘सामान आखिर है क्या?’

पाली (उमरिया)। ₹7 लाख के फिनायल घोटाले के बाद पाली नगर पालिका एक बार फिर खरीदी के नाम पर कठघरे में है। इस बार मामला ₹7 लाख 80 हजार की “नॉन एंटी सेट-ऑफ स्प्रे पाउडर” खरीदी का है। जानकारी के अनुसार नगर पालिका द्वारा करीब 15,000 किलोग्राम सामग्री खरीदी गई है, जिसका भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि आखिर यह सामग्री है क्या और इसका उपयोग किस कार्य में होना है।

बताया जा रहा है कि यह पूरी सामग्री फिलहाल नगर पालिका के टिनचिंग ग्राउंड में रखी हुई है, जहां न तो इसके भंडारण की कोई वैज्ञानिक व्यवस्था दिखाई देती है और न ही यह स्पष्ट है कि इस कथित केमिकल का उपयोग कब और किस योजना के तहत किया जाएगा।

सब इंजीनियर संतोष पांडे से जब इस खरीदी पर फोन पर चर्चा की गई तो उन्होंने उल्टा सवाल कर दिया—“ये क्या है, आप जानते हो क्या?” इसके बाद उन्होंने खुद ही स्वीकार किया कि उन्हें इस पाउडर की जानकारी नहीं है। मात्रा और दर पूछने पर उन्होंने कहा—“अभी ऑपरेट नहीं है, आएगा तो पूछकर बताऊंगा।” जब उनसे यह पूछा गया कि सामग्री का सत्यापन आखिर किसने किया, तो वे झल्ला गए और फोन काट दिया।

संतोष पांडे की यह भूमिका नगर पालिका में जवाबदेही की धज्जियां उड़ाती नजर आती है। इंजीनियर होने के नाते तकनीकी सत्यापन और भुगतान की जिम्मेदारी उनकी ही होती है, लेकिन उन्होंने इसे एक ताश के पत्तों की तरह हवा में उड़ा दिया। उनकी यह अनभिज्ञता और बेपरवाही ऐसे सवाल खड़े करती है कि क्या वे अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारी को भूल चुके हैं या जनता के पैसों के साथ खेल रहे हैं?

स्टोर प्रभारी पुरुषोत्तम प्रजापति ने यह जरूर स्वीकार किया कि 50 किलो की बोरियों में कुल 300 बोरी, यानी 15,000 किलो स्प्रे पाउडर खरीदा गया है, लेकिन इससे आगे कोई जानकारी देने से बचते हुए उन्होंने पूरा मामला “साहब” पर डाल दिया। तकनीकी अमले से जुड़े ई. अरविंद शर्मा ने भी इस पाउडर के बारे में जानकारी न होने की बात कही।

हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका में पहुंची बोरियों पर न ब्रांड का नाम, न केमिकल का स्पष्ट विवरण, न बैच नंबर और न ही उपयोग संबंधी निर्देश दर्ज हैं। इसके बावजूद लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार यह सप्लाई सागर जिले की एक निर्माण एजेंसी के माध्यम से की गई है, जो निर्माण कार्यों के साथ-साथ सामग्री आपूर्ति का कार्य भी करती है। सप्लायर का दावा है कि यह नालियों में उपयोग होने वाला केमिकल पाउडर है, लेकिन इसके मानक, अनुमोदन और स्वीकृत श्रेणी को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब इंजीनियर को ही नहीं पता कि सामग्री क्या है, स्टोर प्रभारी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है और तकनीकी अमला अनभिज्ञ बना हुआ है, तो आखिर सत्यापन किस आधार पर किया गया और भुगतान किसके आदेश से हुआ?

स्थानीय जानकारों का कहना है कि यदि नगर पालिका द्वारा फिनायल खरीदी और इस कथित स्प्रे पाउडर की खरीद ही नहीं, बल्कि पिछले वर्षों में कराए गए निर्माण कार्यों, मरम्मत, सफाई, केमिकल सप्लाई और अन्य सामग्री खरीद की भी गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो ऐसे कई और मामले सामने आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के उजागर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इन दिनों पाली नगर पालिका में जनता के पैसों की जमकर लूट मची हुई है—ऐसी चर्चा आम हो चली है। पहले फिनायल, अब यह रहस्यमय स्प्रे पाउडर—लगातार सामने आ रहे मामलों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय जानकारों का यह भी कहना है कि यदि पिछले दो साल में हुई सभी खरीदारी, जिनमें ₹5 लाख से अधिक के भुगतानों को शामिल किया जाए, उसकी गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो केवल इस स्प्रे पाउडर तक ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की परतें खुलने की संभावना है। ऐसे में सवाल यह उठना स्वाभाविक है कि आखिर जब फिनायल और स्प्रे पाउडर जैसी खरीदी भी बिना सही जवाबदेही और सत्यापन के हो सकती है, तो अन्य बड़े भुगतान और सामग्री खरीदी भी कितनी पारदर्शी रही होगी।

अब यह मामला केवल खरीदी का नहीं, बल्कि नगर पालिका में जनता के पैसों की सुरक्षा, जवाबदेही और प्रशासनिक सतर्कता का भी परीक्षण बन गया है। पहले फिनायल, अब नॉन एंटी सेट-ऑफ स्प्रे पाउडर— पाली नगर पालिका में सवालों का अंबार और संभावित भ्रष्टाचार की चेतावनी लगातार बढ़ती जा रही है।

गौरतलब है कि वर्तमान में पाली नगर पालिका में भाजपा की परिषद है। ऐसे में इन घोटालों और संदिग्ध खरीदियों से भाजपा की छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि भाजपा के उच्च पदों पर बैठे जिम्मेदार नेता इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हैं या फिर भाजपा की चुप्पी भी सवालों के घेरे में आ जाएगी।

कलेक्टर धरणेंद्र जैन का कहना है कि फिनायल खरीदी मामले की जांच पहले से जारी है और इस नए प्रकरण की जानकारी लेकर आगे आवश्यक कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

अब सवाल यह नहीं है कि खरीदी हुई या नहीं, सवाल यह है कि क्या पाली नगर पालिका में जनता का पैसा यूं ही बिना जानकारी, बिना जवाबदेही और बिना डर के उड़ाया जाता रहेगा?