भोपाल में नई जिम्मेदारी, फिर चर्चा में कलेक्टर हर्षल पंचोली! बिजली परियोजनाओं की पर्यावरणीय मंजूरी पर उठने लगे सवाल

भोपाल/अनूपपुर। अनूपपुर के पूर्व कलेक्टर हर्षल पंचोली के भोपाल में पर्यावरण विभाग से जुड़ी नई जिम्मेदारी संभालने की चर्चाओं के बीच एक बार फिर उनकी भूमिका राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि उनके विभाग में पहुंचने के बाद लंबे समय से अटकी कई बिजली एवं औद्योगिक परियोजनाओं की पर्यावरणीय अनापत्ति (NOC) से जुड़ी फाइलों में तेजी आ सकती है।

सूत्रों के अनुसार, पर्यावरण विभाग में उनकी नई जिम्मेदारी ऐसी मानी जा रही है, जहां से बड़ी औद्योगिक और बिजली परियोजनाओं की पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है।

*अनूपपुर के कार्यकाल की फिर होने लगी चर्चा*

अनूपपुर में कलेक्टर रहते हुए हर्षल पंचोली के कार्यकाल के दौरान कई बड़ी औद्योगिक एवं बिजली परियोजनाओं को लेकर प्रशासन की भूमिका चर्चा में रही थी। उस समय पर्यावरणीय नियमों के तहत जनसुनवाई आयोजित कराई गई थी, लेकिन अनेक सामाजिक संगठनों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और प्रभावित ग्रामीणों ने जनसुनवाई की निष्पक्षता, पारदर्शिता और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व न दिए जाने के आरोप लगाए थे।

स्थानीय लोगों का आरोप था कि ग्रामीणों की आपत्तियों और पर्यावरणीय चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए परियोजनाओं से संबंधित दस्तावेज और अनुशंसाएं भोपाल भेजी गईं, जहां बाद में पर्यावरणीय अनापत्ति (NOC) से जुड़ी कई फाइलें लंबित हो गई थीं।

अब फिर गर्म हुआ चर्चाओं का बाजार

अब जब हर्षल पंचोली के पर्यावरण विभाग में पहुंचने की चर्चा है, तो यह अटकलें भी तेज हो गई हैं कि जिन बिजली परियोजनाओं की पर्यावरणीय मंजूरी लंबे समय से रुकी हुई है, उनकी फाइलों पर जल्द निर्णय हो सकता है। इस संभावना को लेकर प्रशासनिक और औद्योगिक हलकों में चर्चाओं का दौर जारी है।
सामाजिक संगठनों ने उठाई पारदर्शिता की मांग
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि लंबित परियोजनाओं को स्वीकृति दी जाती है, तो पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उनका कहना है कि प्रत्येक परियोजना का मूल्यांकन पर्यावरणीय कानूनों, स्थानीय लोगों के हितों और वैज्ञानिक मानकों के आधार पर किया जाए तथा निर्णय प्रक्रिया की स्वतंत्र निगरानी भी सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी प्रकार के पक्षपात या हितों के टकराव की आशंका न रहे।