मशहूर हैं अनूपपुर के जामुन, दूसरे राज्यों में भी बढ़ी मांग
स्वाद के साथ सेहत का खजाना बने जिले के जामुन, किसानों को मिल रहा बेहतर बाजार


अनूपपुर। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाले जामुन इन दिनों अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पौष्टिकता के कारण लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में जामुन स्थानीय बाजारों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों तक पहुंच रहे हैं। व्यापारी बताते हैं कि अनूपपुर के जामुन का स्वाद और आकार अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
बरसात के मौसम में उपलब्ध होने वाला यह मौसमी फल ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का भी महत्वपूर्ण साधन बन गया है। ग्रामीण परिवार सुबह जंगलों और खेतों के आसपास से जामुन एकत्र कर स्थानीय मंडियों और बाजारों में बेचते हैं। इससे उन्हें रोजगार के साथ अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त होती है।
स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी
विशेषज्ञों के अनुसार जामुन में विटामिन-सी, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। जामुन का सेवन पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में सहायक माना जाता है। इसके बीजों का चूर्ण भी पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता है, हालांकि किसी भी औषधीय उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
दूसरे राज्यों तक पहुंच रहे अनूपपुर के जामुन
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार अनूपपुर से जामुन की खेप मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के अलावा छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों तक भेजी जा रही है। स्वाद और गुणवत्ता के कारण इसकी मांग हर वर्ष बढ़ती दिखाई दे रही है। मौसम अनुकूल रहने पर किसानों और संग्रहकर्ताओं को इसका अच्छा मूल्य भी मिल जाता है।
प्रसंस्करण की अपार संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिले में जामुन आधारित प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएं तो जामुन से जैम, जूस, सिरका, स्क्वैश, कैंडी और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
प्रशासन से अपेक्षा
कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जामुन के संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन के लिए विशेष योजना बनाई जाए तथा किसानों और वन उत्पाद संग्रहकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाए, तो अनूपपुर के जामुन को राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान मिल सकती है। इससे जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।