महिला यात्री के लिए डिप्टी स्टेशन मास्टर ने रूकवाई ट्रेन, आरपीएफ पुलिस ने कर दी लात घुसो से कुटाई

आगरा / अनूपपुर। उत्तर प्रदेश के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर रविवार सुबह एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने रेलवे प्रशासन और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हीराकुंड एक्सप्रेस के प्लेटफॉर्म पर पहुंचने और रवाना होने के दौरान एक महिला यात्री की सुरक्षा को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट और हंगामे में बदल गया।

जानकारी के अनुसार, महिला यात्री रंजीता राव ट्रेन में सवार होने की कोशिश कर रही थीं। इसी दौरान वह प्लेटफॉर्म पर मिठाई खरीद रही थीं और पैसे का भुगतान कर रही थीं कि ट्रेन चलने लगी। महिला के अनुसार, उनके पैर में चोट भी थी, जिसके कारण वह समय पर ट्रेन में नहीं चढ़ सकीं। स्थिति को देखते हुए डिप्टी स्टेशन अधीक्षक (डिप्टी एसएस) नरेंद्र सिंह चाहर ने यात्री की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रेन रुकवाने की कार्रवाई की।

आरोप है कि ट्रेन रुकवाने को लेकर आरपीएफ और डिप्टी स्टेशन अधीक्षक के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि आरपीएफ के कुछ जवानों ने नरेंद्र सिंह चाहर के साथ मारपीट की और उन्हें घसीटते हुए आरपीएफ थाने तक ले गए। इस घटना से प्लेटफॉर्म पर अफरातफरी मच गई और यात्रियों के बीच दहशत का माहौल बन गया। कुछ समय तक ट्रेन भी स्टेशन पर खड़ी रही।

घटना के बाद महिला यात्री रंजीता राव का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, “न तो हमारी कोई गलती थी और न ही सर की। मेरे पैर में चोट लगी हुई है। मैं मिठाई ले रही थी और पैसे दे रही थी, तभी ट्रेन चल पड़ी। मैं ट्रेन में नहीं चढ़ पाई तो सर ने ट्रेन रुकवा दी।

 इसके बाद आरपीएफ के जवान आए और सर से मारपीट करने लगे। मेरे और सर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है तथा मुझसे एक हजार रुपये भी लिए गए हैं।”

मामले ने तूल पकड़ने के बाद रेलवे प्रशासन ने प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत चार आरपीएफ कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं घटना की विस्तृत जांच कराई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और किसकी भूमिका कितनी जिम्मेदार थी।

रेलवे कर्मचारियों के बीच भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी ने यात्री की सुरक्षा के लिए कदम उठाया तो उसके साथ इस प्रकार का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। वहीं दूसरी ओर आरपीएफ की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रेलवे प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या निष्कर्ष निकालता है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।