*मां नर्मदा की सायंकालीन महाआरती में देशभर के पत्रकारों की आस्था का संगम*

श्री निवास मिश्रा 
अमरकंटक (मध्य प्रदेश)।
मां नर्मदा की पावन उद्गम स्थली अमरकंटक में सायंकाल आयोजित भव्य महाआरती उस समय विशेष आध्यात्मिक स्वरूप में परिवर्तित हो गई, जब देश के विभिन्न राज्यों से आए पत्रकार बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक के दौरान आयोजित इस महाआरती ने पत्रकारों के बीच आस्था, एकता और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
सायंकाल जैसे ही आरती का समय हुआ, मां नर्मदा मंदिर परिसर दीपों की रोशनी और भक्तिमय संगीत से आलोकित हो उठा। शंखध्वनि, घंटों की गूंज और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब महाआरती प्रारंभ हुई, तो उपस्थित पत्रकारों ने भी श्रद्धा भाव से इसमें भाग लिया। कई पत्रकारों ने दीप प्रज्वलित कर मां नर्मदा से देश की समृद्धि, समाज की खुशहाली और पत्रकारों की सुरक्षा व सम्मान की कामना की।
इस दौरान पूरे परिसर में एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हुआ। देश के कोने-कोने से आए पत्रकारों ने न केवल इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया, बल्कि अमरकंटक की पवित्रता और सांस्कृतिक विरासत को भी नजदीक से महसूस किया।
कार्यक्रम में शामिल पत्रकारों ने कहा कि व्यस्त जीवन और पेशेवर चुनौतियों के बीच इस तरह का आध्यात्मिक अनुभव उन्हें नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच प्रदान करता है। कई पत्रकारों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया।
महाआरती के दौरान “हर-हर नर्मदे” और “जय मां नर्मदा” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। यह दृश्य न केवल आस्था का प्रतीक था, बल्कि पत्रकार समुदाय की एकजुटता और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी सशक्त उदाहरण बना।

 *विशेष बात:* इस महाआरती में शामिल होकर देशभर के पत्रकारों ने यह संदेश दिया कि वे केवल समाज के प्रहरी ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संवाहक भी हैं।

*अमरकंटक में मां नर्मदा की सायंकालीन महाआरती में पत्रकारों की सहभागिता ने इस आयोजन को और भी ऐतिहासिक बना दिया। यह अवसर न केवल आध्यात्मिक अनुभूति का केंद्र बना, बल्कि देशभर के पत्रकारों के बीच आपसी संवाद, एकता और भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम भी साबित हुआ।*