अमरकंटक में ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन 9 से 11 फरवरी तक चला महाअनुष्ठान,जयपुर से मंगाई गई ग्रेनाइट की मां नर्मदा जी की भव्य प्रतिमा का हुआ प्राण प्रतिष्ठा एवं विशाल भंडारा ,,संवाददाता - श्रवण कुमार उपाध्याय 

अमरकंटक - मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक जो 
मध्यप्रदेश की जीवनरेखा , पुण्य सलिला मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक में 9 फरवरी से प्रारंभ हुआ त्रिदिवसीय महाअनुष्ठान 11 फरवरी को नई मां नर्मदा की प्रतिमा की विधिवत स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा के साथ संपन्न हुआ । इस भव्य धार्मिक आयोजन ने न केवल अमरकंटक बल्कि आसपास के क्षेत्रों को भी भक्ति , श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना से आलोकित कर दिया ।

यह संपूर्ण आयोजन वीतराग परम तपस्वी बाबा कल्याण दास जी महाराज के पावन आशीर्वाद से सम्पन्न हुआ । उनके सान्निध्य एवं प्रेरणा से मां नर्मदा की नवीन प्रतिमा जो जयपुर से काले ग्रेनाइट पत्थर में उत्कृष्ट शिल्पकला के साथ निर्मित कर मंगाई गई थी । प्रतिमा का दिव्य स्वरूप , शांत मुखमंडल और आकर्षक आभा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था एवं श्रद्धा का केंद्र रहेगा ।

कार्यक्रम में मुख्य यजमान के रूप में श्री हिमाद्री मुनि जी महाराज (प्रबंध न्यासी श्री कल्याण सेवा आश्रम) एवं अनूपपुर कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली जी सपत्नीक उपस्थित रहे । उन्होंने वैदिक आचार्यों के निर्देशन में विधिपूर्वक पूजन-अर्चन कर मां नर्मदा से प्रदेश , राष्ट्र और समस्त मानवता के कल्याण की कामना की ।

9 फरवरी को मंदिर परिसर की शुद्धि , मंडप स्थापना , कलश स्थापना एवं गणेश-अंबिका पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । इसके पश्चात प्रतिमा के दिव्यीकरण हेतु अधिवास विधियां सम्पन्न की गईं—

जलाधिवास – पवित्र जल में प्रतिमा को स्थापित कर दिव्यता का आह्वान ।

धान्याधिवास – अन्न में विराजमान कर स्थायित्व एवं समृद्धि की कामना ।

घृताधिवास – घृत से अभिषेक कर तेज एवं ओज की स्थापना।

10 फरवरी को यज्ञ-हवन , वैदिक मंत्रोच्चार एवं पंचामृत अभिषेक सम्पन्न हुआ । दूध , दही , घी , शहद , शक्कर एवं पवित्र नदियों के जल से मां नर्मदा का अभिषेक किया गया । शंखनाद , घंटाध्वनि और “जय मां नर्मदा” के उद्घोष से पूरा उद्गम कुंड परिसर भक्तिमय हो उठा ।

11 फरवरी: प्राण प्रतिष्ठा का पावन क्षण

11 फरवरी को शुभ मुहूर्त में प्रतिमा की विधिवत स्थापना की गई । अनुष्ठान का सबसे अलौकिक क्षण नेत्रोन्मीलन रहा जब स्वर्ण शलाका से मां की प्रतिमा की आंखों का उद्घाटन किया गया । परंपरा अनुसार दर्पण दिखाकर दिव्य ऊर्जा का पुनः प्रतिष्ठापन किया गया ।

इसके उपरांत वैदिक आचार्यों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा मंत्रों का उच्चारण कर प्रतिमा में दिव्य चेतना का संचार किया गया । षोडशोपचार पूजन , वस्त्राभूषण अर्पण एवं भव्य महाआरती के साथ यह दिव्य अनुष्ठान पूर्ण हुआ ।

पूरे कार्यक्रम का संचालन आचार्य पंडित कामता प्रसाद द्विवेदी के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ । उनके साथ पंडित उमेश प्रसाद द्विवेदी , पंडित उत्तम प्रसाद द्विवेदी , पंडित जुगल द्विवेदी , पंडित मुकेश पाठक , पंडित रुपेश द्विवेदी एवं पंडित सानू द्विवेदी ने विधि-विधान से सम्पन्न कराया ।

कन्या पूजन से मिला मातृशक्ति का सम्मान

प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत परंपरानुसार कन्या पूजन किया गया । छोटी-छोटी कन्याओं को मां नर्मदा का स्वरूप मानकर उनके चरण पूजे गए , तिलक लगाकर सम्मानपूर्वक प्रसाद एवं उपहार प्रदान किए गए । इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया ।

समापन उपरांत श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद 

कार्यक्रम के समापन पर मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया । दूर-दराज़ से आये  श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया । विशेष रूप से खिचड़ी एवं शुद्ध घी से निर्मित हलवे का भोग श्रद्धालुओं में वितरित किया गया ।

भंडारे की व्यवस्थाएं अत्यंत सुव्यवस्थित रहीं । स्वयंसेवकों एवं आश्रम के सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक प्रसाद परोसा । पूरे वातावरण में सेवा , समर्पण और सद्भाव की अद्भुत भावना देखने को मिली ।

मां नर्मदा के जयकारों और भक्ति गीतों के बीच भंडारे का दृश्य अत्यंत प्रेरणादायी रहा । यह आयोजन सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता का भी संदेश देता नजर आया ।

संत-महात्माओं एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी रही उपस्थिति

इस अवसर पर स्वामी नर्मदानंद जी महाराज , स्वामी राघवानंद जी महाराज , पत्रकार उमाशंकर पांडेय , रणजीत सिंह , मार्कंडेय शर्मा , श्याम लाल सेन सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक , समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे । 
नई ग्रेनाइट प्रतिमा की स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा के साथ अमरकंटक की धार्मिक गरिमा में एक नया अध्याय जुड़ गया है । श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां नर्मदा की असीम कृपा से क्षेत्र में शांति , समृद्धि , सांस्कृतिक जागरण और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा ।