माता बिरासिनी के दरबार से नवागत कलेक्टर का संकल्प: जनता से जुड़कर उमरिया को बनाएंगे स्वर्णिम जिला, हर क्षेत्र में दिलाएंगे जिले को पहचान


 उमरिया/पाली - उमरिया जिला में नवागत कलेक्टर राखी सहाय ने पदभार ग्रहण करते ही आस्था का केंद्र माता बिरासिनी मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने जिले के सर्वांगीण विकास का संकल्प लिया और मीडिया से बातचीत में अपने विज़न को साझा किया।
कलेक्टर ने कहा कि माता बिरासिनी के दर्शन कर उनका मन अत्यंत प्रफुल्लित हुआ और उन्होंने संकल्प लिया है कि उनके कार्यकाल में उमरिया जिला हर क्षेत्र में उत्तरोत्तर प्रगति करेगा। उन्होंने कहा कि “हमारा प्रयास रहेगा कि जिले का नाम मध्यप्रदेश के स्वर्णिम जिलों में शुमार हो,सम्पूर्ण क्षेत्र का विकास हो और आमजन को उसका पूरा लाभ मिले।”


*“पिछड़ेपन की छवि बदलना प्राथमिकता”*
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने लोगों से सुना है कि उमरिया जिला कई क्षेत्रों में पिछड़ा माना जाता है, लेकिन उनके कार्यकाल में यह छवि बदलेगी।
उन्होंने कहा, “मैं चाहूंगी कि उमरिया हर क्षेत्र में अव्वल बने और विकास की नई मिसाल पेश करे।”
आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष फोकस


*आदिवासी बहुल जिले को लेकर कलेक्टर ने* *गंभीरता दिखाई* उन्होंने कहा कि वे जल्द ही गांव-गांव भ्रमण शुरू करेंगी और सीधे आदिवासी समुदाय से जुड़कर उनकी समस्याओं को समझेंगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं कई बार दूर-दराज क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पातीं, ऐसे में प्रशासन का प्रयास रहेगा कि ये सुविधाएं सरल और प्रभावी ढंग से हर जरूरतमंद तक पहुंचें, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके।
“जनता से सीधा संवाद ही समाधान की कुंजी”
जनता से जुड़ाव को लेकर कलेक्टर ने कहा कि वे हमेशा लोगों के लिए उपलब्ध रहेंगी।
उन्होंने कहा, “जितना हम लोगों से मिलते हैं, उतनी ही नई समस्याएं और नए समाधान सामने आते हैं। बंद कमरे में बैठकर जनसमस्याओं को समझा नहीं जा सकता।”
*जनसुनवाई पर दिया भरोसा*
जनसुनवाई व्यवस्था को लेकर कलेक्टर ने कहा कि उनकी प्राथमिकता रहेगी कि हर व्यक्ति की बात सुनी जाए और समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाए।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि “जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों का हर स्तर पर गंभीरता से समाधान किया जाएगा।”
इसी दौरान कलेक्टर ने पाली स्थित शासकीय महाविद्यालय में संचालित जनगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण भी किया। उन्होंने प्रशिक्षण की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और उपस्थित प्रशिक्षुओं को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ संपन्न किया जाए, ताकि सही और सटीक आंकड़े सामने आ सकें।
फिलहाल आस्था के दरबार से विकास का संकल्प लेकर नवागत कलेक्टर ने साफ कर दिया है कि उनका फोकस उमरिया को नई पहचान दिलाने पर रहेगा वही अब देखना होगा कि ये संकल्प जमीनी हकीकत में कितनी तेजी से बदलता है।