अनूपपुर में कानून बेड़ियों में, माफिया बेखौफ! खनिज विभाग से लेकर कलेक्टर तक माफिया मुदित श्रीवास्तव के आगे नतमस्तक,अनूपपुर में माफिया मुदित श्रीवास्तव का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी - विजय उरमलिया की कलम से
अनूपपुर में कानून बेड़ियों में, माफिया बेखौफ! खनिज विभाग से लेकर कलेक्टर तक माफिया मुदित श्रीवास्तव के आगे नतमस्तक,अनूपपुर में माफिया मुदित श्रीवास्तव का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी - विजय उरमलिया की कलम से

अनूपपुर - जिले में प्रशासनिक व्यवस्था किस कदर माफियाओं के सामने घुटने टेक चुकी है, इसकी सबसे बड़ी मिसाल अनूपपुर जिले में खुलेआम देखी जा सकती है। ग्राम ओढेरा में संचालित जय माता दी स्टोन क्रेशर का मालिक माफिया मुदित श्रीवास्तव खनिज विभाग के संरक्षण में वर्षों से अवैध खनन और बिना रॉयल्टी परिवहन का खेल खेल रहा है, और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
स्थिति यह है कि जिला प्रशासन से लेकर खनिज विभाग तक सब कुछ जानते हुए भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर रहा। इससे साफ जाहिर होता है कि पूरा सिस्टम माफिया के सामने नतमस्तक हो चुका है। नतीजतन, सरकारी खजाने को दिनदहाड़े लूटा जा रहा है और कानून का कोई भय नजर नहीं आता।

बिना रॉयल्टी खुलेआम परिवहन, प्रशासन मौन
दिनांक 19 दिसंबर 2025 को ट्रक क्रमांक MP65GA2551 की टीपी लगभग दोपहर 1 बजे काटी गई, जिसकी वैधता मात्र 3:30 बजे तक थी। इसके बावजूद यही वाहन शाम 5:59 बजे जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक 9 में गिट्टी का परिवहन करता हुआ देखा गया। इस गंभीर मामले की जानकारी कलेक्टर अनूपपुर को भी दी गई, लेकिन प्रशासन ने इसे नजरअंदाज करना ही उचित समझा।
प्रशासन की इस चुप्पी का नतीजा यह हुआ कि माफिया के हौसले और बुलंद हो गए।
24 दिसंबर को फिर वही खेल
आज दिनांक 24 दिसंबर 2025 को ट्रक क्रमांक MP65GA1422 की रॉयल्टी पर्ची सुबह 8:41 बजे सकोला के लिए काटी गई, जिसकी वैधता 11:10 बजे तक थी। लेकिन यही ट्रक दोपहर 3:21 बजे अमरकंटक रोड स्थित चंदास पुल के पास डस्ट का अवैध परिवहन करता हुआ पाया गया — वह भी बिना किसी वैध रॉयल्टी के।
यह साफ दर्शाता है कि माफिया रोजाना रॉयल्टी चोरी कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा है, और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
आखिर किस सौदे के तहत मिल रही खुली छूट?
जिले में माफिया मुदित श्रीवास्तव को खनिज विभाग का सबसे बड़ा दलाल बताया जाता है। सवाल यह है कि खनिज विभाग और माफिया के बीच ऐसा कौन सा गठजोड़ है, जिसके चलते उसे सरकारी खजाने को लूटने की खुली छूट दी गई है?
सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि जिले की कमान संभाल रहे कलेक्टर को लगातार इस माफिया के काले कारनामों की जानकारी दी जा रही है, लेकिन कार्यवाही के नाम पर पूर्ण शांति बनी हुई है।
यह शांति सवालों के घेरे में है — क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है या किसी गुप्त समझौते का नतीजा?
जब कलेक्टर भी मौन, तो लगाम कौन लगाएगा?
यदि खनिज विभाग कार्यवाही नहीं करता और जिला कलेक्टर भी आंखें मूंद लेते हैं, तो फिर सवाल उठता है कि ऐसे माफियाओं पर लगाम कौन लगाएगा?
सरकारी राजस्व की यह खुली लूट आखिर कब रुकेगी?
अनूपपुर में आज भी यह सवाल जस का तस खड़ा है —
क्या कानून माफियाओं के लिए बौना हो चुका है, या फिर सिस्टम पूरी तरह बिक चुका है?


