मेंटेनेंस के नाम पर अनूपपुर की जनता के साथ छलावा? हल्की बारिश में घंटों गुल रही बिजली, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मेंटेनेंस के नाम पर अनूपपुर की जनता के साथ छलावा? हल्की बारिश में घंटों गुल रही बिजली, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
अनूपपुर। जिले में बिजली व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बिजली विभाग द्वारा पिछले कई महीनों से नियमित रूप से मेंटेनेंस कार्य के नाम पर हर सप्ताह 4 से 5 घंटे तक विद्युत आपूर्ति बंद की जा रही है। विभाग का दावा रहा है कि लाइनों की मरम्मत, पेड़ों की कटाई-छंटाई और उपकरणों के रखरखाव के माध्यम से उपभोक्ताओं को बेहतर एवं निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। जहाँ 05 जुलाई को हुई हल्की बारिश के बाद ही जिले के कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति 2 से 03 घंटों तक बाधित रही। कई मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग दो घंटे तक बिजली गुल रहने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा हैं। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि यदि नियमित रूप से मेंटेनेंस कार्य किया जा रहा है तो मामूली बारिश में भी बिजली व्यवस्था क्यों चरमरा जाती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभाग पहले से निर्धारित मेंटेनेंस के नाम पर लंबे समय तक बिजली बंद रखता है, जिससे व्यापार, पढ़ाई और घरेलू कार्य प्रभावित होते हैं। इसके बावजूद बारिश, हवा या अन्य सामान्य परिस्थितियों में भी बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होना विभागीय दावों की पोल खोलता है।
व्यापारियों का कहना है कि बिजली कटौती के कारण उनके कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वहीं विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को भी लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है, जहां बिजली जाने के बाद कई बार घंटों तक आपूर्ति बहाल नहीं हो पाती।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मेंटेनेंस कार्य की समीक्षा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि विभाग नियमित रूप से लाखों रुपये खर्च कर रखरखाव कार्य कर रहा है तो उसका परिणाम उपभोक्ताओं को दिखाई देना चाहिए।
लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी शिकायतों के प्रति गंभीर नहीं हैं। बिजली बाधित होने पर उपभोक्ताओं को संतोषजनक जानकारी नहीं मिलती और कई बार फोन तक रिसीव नहीं किए जाते। इससे आम जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जिलेवासियों ने कलेक्टर एवं उच्च अधिकारियों से मांग की है कि बिजली व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए, मेंटेनेंस कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। नागरिकों का कहना है कि केवल कागजों में मेंटेनेंस दिखाने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर मजबूत विद्युत नेटवर्क और जिम्मेदार कार्यप्रणाली की आवश्यकता है।
फिलहाल हल्की बारिश के बाद घंटों बिजली गुल रहने की घटना ने बिजली विभाग के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं और यह बहस तेज हो गई है कि आखिर नियमित मेंटेनेंस के बावजूद बिजली व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों बनी हुई है।


