मुख्यमंत्री मोहन यादव के गऊ प्रेम को पाली नगर पालिका ने लिया मज़ाक में? NH-43 पर मौत बनकर घूम रहे मवेशी! 

पाली (उमरिया) - NH-43  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने से लाइव तस्वीर,प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव गऊ माता के संरक्षण को लेकर जितने भावुक और आस्थावान दिखते हैं, उतनी ही लापरवाही पाली नगर पालिका के व्यवहार में नज़र आती है। तस्वीर में जो आप देख रहे हैं, वह किसी दूर-दराज के गांव की नहीं, बल्कि एनएच-43 पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली के सामने की है, जहां मवेशी सड़कों पर खुलेआम विचरण कर रहे हैं — और जान जोखिम में डाल रहे हैं।

ये वही NH-43 है जहां दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही होती है। सामने आता ट्रक और सड़क के बीचोंबीच चलती गायें — यह दृश्य हर दिन का है। न वाहन चालक सुरक्षित हैं, न आमजन और न ही ये बेजुबान मवेशी। कई बार दुर्घटनाओं में इंसान घायल होते हैं तो कई बार मवेशी दम तोड़ देते हैं।

नगर पालिका पाली की निष्क्रियता साफ दिखाई देती है। न तो मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोई व्यवस्था है, न कांजी हाउस का प्रबंधन और न ही नगर पालिका की ओर से कोई नियमित अभियान। ऐसा लगता है जैसे नगर पालिका ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के 'गऊ प्रेम' को हल्के में लेते हुए उसे मज़ाक बना रखा है।

इसी तरह नगर के अन्य मुख्य मार्गों में भी मवेशी विचरण करते देखे जा रहे हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है और नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

अगर मुख्यमंत्री जी वास्तव में गऊ माता को मां मानते हैं, तो उन्हें चाहिए कि वे उन निकायों पर सख्ती करें जो इस "मां" को खुलेआम मरने के लिए सड़कों पर छोड़ चुके हैं।

पाली नगर में न तो मवेशियों को बांधने का प्रबंध है, न ही चारे की उचित व्यवस्था। सड़क पर घूमते ये बेजुबान आज प्रशासनिक लापरवाही की सबसे बड़ी तस्वीर बन चुके हैं।

क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव जी सिर्फ मंचों पर गऊ माता की बातें करेंगे, या ज़मीनी हकीकत पर कार्रवाई भी होगी?