यातायात प्रभारी विनोद दुबे के कार्यकाल में अनूपपुर की यातायात व्यवस्था ध्वस्त,जांच नहीं, वसूली अभियान बन चुका है यातायात विभाग - विजय उरमलिया की कलम से
यातायात प्रभारी विनोद दुबे के कार्यकाल में अनूपपुर की यातायात व्यवस्था ध्वस्त,जांच नहीं, वसूली अभियान बन चुका है यातायात विभाग
अनूपपुर - अनूपपुर जिले में यातायात विभाग अब सड़क सुरक्षा का नहीं बल्कि खुली वसूली का प्रतीक बनता जा रहा है। शहर से लेकर नेशनल हाइवे तक यातायात व्यवस्था पूरी तरह बिखरी हुई है, लेकिन यातायात प्रभारी विनोद दुबे के कार्यकाल में विभाग की प्राथमिकता व्यवस्था सुधार नहीं, बल्कि “जांच के नाम पर जेब कटाई” बनकर रह गई है।
वसूली का सिस्टम, कार्रवाई सिर्फ कमजोरों पर
आरोप है कि यातायात पुलिस की कार्रवाई सिर्फ आम वाहन चालकों तक सीमित है। हेलमेट, कागज और सीट बेल्ट के नाम पर लोगों को घंटों रोका जा रहा है, जबकि रसूखदारों और नियमों को खुलेआम रौंदने वालों पर हाथ डालने की हिम्मत विभाग में नहीं दिखाई देती। सवाल यह है कि क्या कानून सिर्फ गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बना है?
बिना नंबर प्लेट के वाहन, प्रशासन की चुप्पी
मुख्यालय क्षेत्र में दर्जनों वाहन बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। इनमें से कई वाहन कथित तौर पर अवैध गतिविधियों में लिप्त बताए जा रहे हैं, लेकिन यातायात विभाग इन पर कार्रवाई करने से साफ बचता नजर आता है। यह लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित अनदेखी मानी जा रही है।
हाइवे बना मौत का रास्ता
नेशनल हाइवे पर ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार, गलत पार्किंग और ट्रैफिक जाम रोज़मर्रा की तस्वीर बन चुकी है। दुर्घटनाएं हो रही हैं, लोग जान गंवा रहे हैं, लेकिन यातायात प्रभारी की कुर्सी पर बैठे अधिकारी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सवाल उठता है कि क्या हादसों की जिम्मेदारी तय होगी या फिर सब कुछ यूं ही चलता रहेगा?
कार्रवाई कागजों में, हालात जमीन पर बदतर
यातायात विभाग हर महीने कार्रवाई के आंकड़े जारी कर अपनी पीठ थपथपाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इन आंकड़ों की पोल खोल देती है। अगर व्यवस्था दुरुस्त होती तो शहर में जाम, अव्यवस्थित पार्किंग और अवैध वाहन क्यों दिखते?
“साहब की सीधी बात” या खुला संरक्षण?
सूत्रों की मानें तो विभाग में यह चर्चा आम है कि “साहब की सीधी बात” के चलते कई मामलों में फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। सवाल यह है कि क्या यातायात प्रभारी को अवैध वाहनों और गतिविधियों का संरक्षण प्राप्त है? अगर नहीं, तो अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
प्रशासन मौन, जनता त्रस्त
जिले के नागरिकों का कहना है कि यातायात विभाग की मनमानी से आम लोग त्रस्त हैं। लोग पूछ रहे हैं—क्या अनूपपुर में कानून नाम की कोई चीज बची है? या फिर यातायात विभाग खुद कानून को ताक पर रखकर मनमानी कर रहा है?
अब बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक इस पूरे मामले पर कब संज्ञान लेंगे? या फिर यातायात प्रभारी विनोद दुबे के कार्यकाल में अनूपपुर की सड़कें यूं ही अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का प्रतीक बनी रहेंगी?


