उमरिया जिले में अवैध शराब के कारोबार पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, आबकारी और पुलिस विभाग की भूमिका पर उठे सवाल


उमरिया। उमरिया जिले में इन दिनों अवैध शराब का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। गांव-गांव, गली-मोहल्लों और गुमटियों तक आसानी से शराब पहुंचने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच बांधवगढ़ एसडीएम अम्बिकेश प्रताप सिंह और पाली एसडीएम मीनाक्षी बंजारे द्वारा की गई ताबड़तोड़ छापेमार कार्रवाई ने एक बार फिर जिम्मेदार विभागों आबकारी और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई से यह साफ संकेत मिल रहा है कि जिले में लंबे समय से चल रहे इस अवैध कारोबार पर जिम्मेदार विभागों का नियंत्रण कमजोर है या फिर शराब माफियाओं को कहीं न कहीं खुला संरक्षण प्राप्त है।


कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय के निर्देशन में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बांधवगढ़ अम्बिकेश प्रताप सिंह ने फजिलगंज क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की शिकायत मिलने पर बड़ी कार्रवाई की। एसडीएम द्वारा पुरानी भट्टी क्षेत्र का निरीक्षण किया गया, जहां दो कमरों में अवैध रूप से शराब का भंडारण और बिक्री करते हुए लोगों को बैठाकर शराब पिलाई जा रही थी। मौके पर राजेश सिंह पिता वंशपति सिंह उम्र लगभग 50 वर्ष निवासी फजिलगंज को उक्त कार्य करते पाया गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह बस स्टैंड स्थित भट्टी से शराब लाकर यहां बिक्री करता है।

कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध शराब जब्त की गई। मामले में पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है।


इसी तरह पाली एसडीएम मीनाक्षी बंजारे ने भी अवैध शराब के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पाली नगर के वीनस होटल, गुरुनानक होटल तथा नया बायपास स्थित राधा कुंज होटल के बाजू में आनंद सिंह के घर पर छापेमार कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध शराब जब्त की गई। खास बात यह रही कि गुरुनानक होटल और वीनस होटल में लोगों को बैठाकर शराब पिलाते पाए जाने पर दोनों प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया, जिसकी नगर में जमकर चर्चा हो रही है।


पाली एसडीएम की सीलबंद कार्रवाई बनी चर्चा का विषय
पाली एसडीएम मीनाक्षी बंजारे ने जब से पाली का पदभार संभाला है, तब से लगातार सख्त कार्रवाईयों को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। अवैध शराब, अतिक्रमण और नियम विरुद्ध गतिविधियों पर उनकी कार्रवाई का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। बीते दिनों माता बिरासिनी मंदिर ट्रस्ट की दुकानों का कई वर्षों से किराया जमा न करने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई करते हुए 8 दुकानों को सील कर दिया गया था। कार्रवाई के बाद महज दो दिनों के भीतर लगभग 12 लाख रुपये किराये की वसूली की गई थी।

इसके अलावा दुकान के बाहर अतिक्रमण कर व्यवसाय करने वालों पर भी कार्रवाई की गई थी। यहां तक कि कचरे से फूल-माला उठाकर दोबारा बेचने की शिकायत पर भी एक दुकान को सील किया गया था। नगर में लोग अब एसडीएम मीनाक्षी बंजारे को “लेडी सिंघम” कहकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं।


जिले में लगातार सामने आ रही अवैध शराब बिक्री की खबरों के बावजूद आबकारी विभाग का मौन रहना कई सवाल खड़े करता है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर आए दिन शराब माफियाओं की गतिविधियों की खबरें सामने आती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अक्सर गरीब आदिवासियों के यहां महुआ लाहन पकड़कर खानापूर्ति कर ली जाती है। जबकि असली शराब माफिया खुलेआम बिना नंबर की गाड़ियों से सुबह से देर रात तक गांव-गांव शराब सप्लाई करते नजर आते हैं।
वहीं पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अक्सर अपराधियों को पाताल से खोज निकालने के दावे करती है, लेकिन खुलेआम हो रही शराब की सप्लाई पर कार्रवाई न होना कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी खुद मैदान में उतरकर अवैध शराब पकड़ सकते हैं तो आबकारी और पुलिस विभाग आखिर अब तक क्या कर रहे थे।
पाली शराब दुकान में प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर शराब बिक्री को लेकर आए दिन विवाद की स्थिति बनती रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो किसी दिन बड़ा विवाद या अप्रिय घटना भी घट सकती है।
“इमरजेंसी खिड़की” से रातभर शराब बिक्री का आरोप
पाली स्थित शराब दुकान में निर्धारित समय के बाद भी शटर में बनी तथाकथित “इमरजेंसी खिड़की” से रातभर शराब बिक्री किए जाने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रातभर पुलिस गश्त करती है, लेकिन शराब दुकान के आसपास हो रही गतिविधियां उन्हें नजर नहीं आतीं। लोगों में यह चर्चा भी है कि शराब दुकान के पास पहुंचते ही पुलिस की नजरें आखिर क्यों बंद हो जाती हैं।