“शासकीय महाविद्यालय कोतमा में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन”

कोतमा। दिनांक 24 फरवरी को शासकीय महाराजा मार्तंड महाविद्यालय कोतमा के नवनिर्मित भवन के सेमिनार हॉल में   भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का विषय "भारतीय भाषाएं एवं भारतीय ज्ञान परंपरा" था। उक्त संगोष्ठी मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत महाविद्यालय के "भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित की गई । सर्वप्रथम मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
            अपने स्वागत उद्बोधन में  महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनय कुमार सोनवानी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में भाषा के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि "यदि हमें भारत को जानना-समझना है, तो भारतीय ज्ञान परम्परा को जाने बिना नहीं समझ सकते। भारतीय भाषाएं और भारतीय ज्ञान परम्परा गंगा की तरह पवित्र, प्रवाहमान, अक्षुण्ण और अबाध हैं। भाषा भी गंगा की तरह अपने प्रवाह में संस्कृति, सभ्यता और स्वर्णिम अतीत को आत्मसात् करके चलती है।" कार्यक्रम की अगली कड़ी में विशिष्ट वक्ता महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक डॉ गिरेंद्र शर्मा ने अपने वक्तव्य में भारतीय भाषाओं का संविधान में समावेश, भारतीय संविधान में भाषाओं को लेकर किए गए प्रावधान, साथ ही भारत भाषाओं का देश है, विषय पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही अपने वक्तव्य में तमिल, नेपाली, पाली, बौद्ध, संस्कृति एवं अन्य भाषाओं का भारतीय ज्ञान परंपरा में योगदान को विस्तार से समझाया। 
             इस संगोष्ठी के अंतिम और मुख्य वक्ता डॉ.नितिन सहारिया ने 
अपने उद्बोधन में बताया कि "भाषाएं संस्कृति की वाहक हैं और उनका सरंक्षण आवश्यक है। प्रत्येक देशवासी को अपनी मातृभाषा के अतिरिक्त एक भारतीय भाषा सीखनी चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा विशाल समुद्र की तरह है जो निर्झरिणी की भाँति कहीं मंद कहीं तीव्र रफ्तार से बहती हुई वर्तमान समय मे हमारे समक्ष है। जो वेदों, उपनिषदों से प्रवाहमान होकर हिन्दी में उपलब्ध है। वैष्णव संप्रदाय में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्य भारतीय संस्कृति की परंपरा में अनमोल धरोहर हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा विकसित होकर भक्ति काल में सर्वाधिक तीव्रता से अभिव्यक्त हुई है। तुलसी व सूर जैसे कवियों ने महाकाव्य की रचना कर उसे जन-जन तक पहुंचाया।"
            इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को गणतंत्र दिवस पर हुए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में सहभागिता हेतु प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में मंच का संचालन संगोष्ठी प्रभारी डॉ. श्री कान्त मिश्र द्वारा किया गया। साथ ही मो. मोबीन, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ प्रभारी द्वारा संगोष्ठी में उपस्थित सभी विद्वतजनों का आभार व्यक्त किया गया ।
          कार्यक्रम में विविध संकायों के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सभी वक्ताओं को ध्यान पूर्वक सुना। उक्त कार्यक्रम में महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. अनीता तिवारी, डॉ. प्रवीण कुमार यादव, डॉ.सुरेश कुमार चौधरी एवं डॉ राजकुमार रैदास ने अपना सहयोग प्रदान किया।