संकल्प से समाधान,शिविर में खाली रहीं कुर्सियां, व्यवस्थाओं पर उठे सवाल,,रिपोर्ट@राजकुमार गौतम उमारिया
संकल्प से समाधान” शिविर में खाली रहीं कुर्सियां, व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

पाली (उमरिया)। “संकल्प से समाधान अभियान (नर सेवा ही नारायण सेवा)” के तहत नगर पालिका पाली द्वारा गायत्री मंदिर के समीप शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में वार्ड क्रमांक 8 से 15 तक के हितग्राहियों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट सकी। बताया गया कि आठ वार्डों से 50 लोग भी उपस्थित नहीं हो पाए, जिससे कई कुर्सियां खाली रहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कम उपस्थिति नगर पालिका की जनजागरूकता और सूचना प्रसार की कमजोरी को दर्शाती है। कार्यक्रम स्थल पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और कर्मचारियों की संख्या अधिक दिखाई दी, जबकि आम नागरिकों की भागीदारी सीमित रही।

कलेक्टर का पक्ष: 2052 आवेदन, 1572 का निराकरण
कार्यक्रम में उपस्थित धरनेंद्र जैन से जब पूछा गया कि “नर सेवा ही नारायण सेवा” के इस आयोजन में आम नागरिकों की कम उपस्थिति पर क्या कहेंगे, तो उन्होंने योजना का विस्तृत उद्देश्य समझाया।
कलेक्टर ने बताया कि “संकल्प से समाधान” अभियान के तहत प्रत्येक वार्ड में दल गठित किए गए हैं, जो डोर-टू-डोर जाकर नागरिकों की समस्याओं के आवेदन ले रहे हैं। उनके अनुसार अब तक कुल 2052 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1572 आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। शिविर में आने वाले शेष आवेदनों का भी त्वरित समाधान किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि योजना का तृतीय चरण ब्लॉक स्तर और चतुर्थ चरण जिला स्तर पर आयोजित किया जाएगा।
हितग्राहियों को प्रमाण पत्र भी वितरित
शिविर के दौरान कलेक्टर द्वारा कुछ हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृति एवं प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। इसमें लाड़ली लक्ष्मी योजना, स्ट्रीट वेंडर योजना, स्वीकृति राशि वितरण, फौती नामांतरण तथा सम्बल योजना के प्रमाण पत्र शामिल रहे। प्रशासन ने इसे जनकल्याणकारी योजनाओं को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की पहल बताया।
माता बिरासिनी के छायाचित्र को लेकर नाराजगी
कार्यक्रम स्थल पर विश्व प्रसिद्ध माता बिरासिनी मंदिर का छायाचित्र मंच पर रखा गया था तथा दीप भी रखा गया था, लेकिन दीप प्रज्वलन या विधिवत पूजा-अर्चना नहीं की गई।
इस बात को लेकर कुछ स्थानीय नागरिकों में नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि जब सरकार किसी भी कार्यक्रम से पूर्व स्थानीय देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेकर शुभारंभ करती है, तो यहां केवल औपचारिकता निभाई गई, जिससे धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची है।
खरीद-फरोख्त और जनहित पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा रही कि नगर पालिका में इन दिनों विभिन्न कार्यों में मनमाने तरीके से खरीद-फरोख्त और भुगतान हो रहे हैं। कुछ नागरिकों ने आरोप लगाया कि शासन की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है तथा जनहित की योजनाओं की अपेक्षा व्यक्तिगत हितों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
अब कार्रवाई या औपचारिकता?
“संकल्प से समाधान” अभियान का उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान बताकर शुरू किया गया है, लेकिन पाली में आयोजित शिविर की कम भागीदारी और उठते सवाल यह संकेत देते हैं कि जमीनी स्तर पर और अधिक पारदर्शिता एवं जनसंपर्क की आवश्यकता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इन शिकायतों और नाराजगी को किस तरह संबोधित करता है, ताकि अभियान अपने वास्तविक उद्देश्य तक पहुंच


