बीएसएफ को पचास किलोमीटर तक तलाशी व गिरफ्तारी के अधिकार का नया नियम गैरकानूनी व असंवैधानिक - प्रमोद तिवारी @ रिपोर्ट धर्मेन्द्र श्रीवास्तव प्रतापगढ़

लालगंज, प्रतापगढ़। केन्द्रीय कांग्रेस वर्किग कमेटी के सदस्य एवं यूपी आउटरीच एण्ड कोआर्डिनेशन कमेटी के प्रभारी प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये नये नियम के तहत बीएसएफ को सीमा से पचास किलोमीटर के अंदर गिरफ्तारी तथा तलाशी और जब्ती करने के अधिकार को दुर्भाग्यपूर्ण एवं संघीय ढांचे की पृष्ठभूमि में खतरनाक निर्णय करार दिया है। इस नये नियम से पचास किलोमीटर के दायरे मे केन्द्र एवं प्रदेश दोनों के अधिकारों पर ओवरलैपिंग यानि आपसी टकराव का भी खतरा उठ खड़ा होगा। केंद्र सरकार इस निर्णय को फौरन वापस ले ताकि देश के कई राज्यों की संवेदनशीलता को देखते हुए वहां शांति के लिए खतरा अथवा असंतोष पैदा न हो सके। सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से यहां जारी बयान मे कहा है कि भारत का लोकतंत्र संघीय ढांचे पर आधारित है और देश के विभिन्न राज्य भारत गणराज्य का मजबूत हिस्सा है। संविधान मे केन्द्र और प्रदेश के अधिकारों को परिभाषित किया गया है। उन्होने स्पष्ट किया कि गृह विभाग के तहत प्रदेश की कानून व्यवस्था पूर्णरूप से राज्य का विषय है।केंद्र के इस निर्णय को बेतुका ठहराते हुए कहा कि भाजपा की सरकार उसी संघीय ढांचे पर प्रहार करते हुए संविधान की मूल आत्मा तक को नष्ट करने पर अमादा हो चुकी है। उन्होनें सवाल उठाया कि केंद्र बताये कि सीमा सुरक्षा बल को जिस नये निर्णय के तहत पचास किलोमीटर के दायरे मे ऐसे अधिकार सौपे क्यों सौपें गये हैं। यह भी सवाल उठाया कि इस खतरनाक स्थिति मे अब जब कभी किसी विषय पर मतभेद या तनातनी हुई तो क्या अर्धसैनिक बल और प्रदेश के पुलिस बल मे एक दूसरे के खिलाफ बल का प्रयोग होगा। केंद्र के इस नये निर्णय से भाजपा की मंशा देश को गृह युद्ध की तरफ भी ढकेलने की संविधान विरोधी और गैरकानूनी साबित हो रही है। उन्होनें बतौर उदाहरण कहा कि पंजाब और राजस्थान सहित पूर्वोत्तर के तमाम राज्य की सीमाएं पचास किलोमीटर के दायरे मे लगभग उस प्रदेश के बहुत जगहों पर बराबर होगें। इस तरह यदि दो तरफ की सीमाओं पर बीएसएफ तैनात होगी तो उसका दायरा सौ किलोमीटर होगा। उन्होनें कहा कि देश के ही आंतरिक सुरक्षा बलों के बीच यह स्थिति संवेदनशील और भ्रम पैदा करने वाली होगी। श्री तिवारी ने अरूणांचल प्रदेश, सिक्किम, नागालैण्ड, मेघालय, असम, पंजाब, जम्मू कश्मीर, राजस्थान तथा पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को तो केंद्र का यह असंवैधानिक निर्णय सीधे सीधे धधकती आग मे ढ़केलने की ओर है। उन्होनें सरकार से कहा है कि राजनैतिक विद्वेष की भावना से लिया गया यह निर्णय इससे पहले कि केंद्र और प्रदेश के अधिकारों को लेकर कहीं एक नई बहस का हिस्सा न बन जाय। सरकार अपनी भूल सुधारे और केंद्र और प्रदेश के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न होने के खतरे का आकलन करते हुए इस अत्यन्त गैरकानूनी अपने फैसले को बेहिचक रदद करे। वहीं प्रमोद तिवारी ने प्रदेश मे खासकर ग्रामीण अंचलों मे प्रतिदिन बिजली के गहराते संकट पर भी सरकार से कहा है कि वह सिर्फ घोषणाएं और बयानबाजी अपनी जबाबदेही से मुंह न मोड़े। उन्होनें कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की स्थिति को संभाले अन्यथा बकौल प्रमोद तिवारी प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा लम्बे समय तक बिजली संकट का शिकार होता रहेगा। कोयले की अप्राकृतिक संकट को भी पैदा करने के जिम्मेदार लोगों को कटघरे मे खड़ा करते हुए सरकार से ऐसे आरोपियो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी पर भी जोर दिया है। प्रदेश मे लगातार गहराते बिजली संकट को लेकर प्रमोद तिवारी ने स्पष्ट कहा कि आपूर्ति को लेकर सरकार की बयानबाजी वास्तविक हालात से पूरी तरह भिन्न साबित हो उठे है।