सावधान कहीं आप अपने बच्चे का ऐडमिशन सेंट जोसेफ बिजुरी में तो नही करा रहे,हो जाये सावधान स्कूल नही कबाब शराब का अड्डा है 
अनूपपुर - कहते है बच्चे की प्रथम पाठशाला उसका अपना परिवार है और माता पिता की नजर में बच्चे का भविष्य घर से ज्यादा स्कूल कहें या शिक्षा का मंदिर जहां पूरी विश्वसनीयता के साथ हर माता पिता अपने बच्चों को सात से आठ घंटे उन गुरुओं के भरोसे छोड़ते है जिन पर बच्चों के भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है और माता पिता का विश्वास शायद अपने परिवार,रिश्तेदारों, पड़ोसियों से कहीं बढ़ कर उस शिक्षा के मंदिर के अध्यापकों पर होता है एक बार माता पिता पड़ोसी,भाई,सगे संबंधियों के साथ 10 से 15 मिनट छोड़ने के बाद चिंता में रहते है की उनका बच्चा कैसा होगा पर जब स्कूल की बात आती है तो हर माता पिता बच्चे को साथ से आठ घंटे के लिए स्कूल भेजने के बाद जरा सी चिंता मन मे नही रखता की उनका बच्चा कैसा होगा ऐसे विश्वास आपको दुनिया मे सिर्फ और सिर्फ अभिभावक और स्कूल के बीच ही देखने को मिल सकता है और ऐसे विश्वास को जब बिजुरी में संचालित सेंट जोसेफ जैसे विद्यालय जो शिक्षा के मंदिर को तार तार करते दिखते है तब अभिभावकों का भरोषा शिक्षा के मंदिरों से टूटने लगता है,
दरसल हाल ही में बिजुरी के सेंट जोसेफ स्कूल में मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने दबिश दे कर जांच की थी और जांच में पाया था कि स्कूल में भारी अनियमितता है और साथ ही स्कूल परिसर के उस हिस्से में जहां पर आवासीय क्षेत्र था वहां पर फ्रिजों में भारी मात्रा में मांस मिला था साथ ही शराब की खाली बोतले मिलने से हड़कंप मच गया था अब सवाल यह उठता है कि आखिर स्कूल क्षेत्र में शराब की बोतलें कहाँ से आई और इतनी मात्रा मांस की मौजूदगी किसी और तरफ इशारा कर रही है,इस पूरे मामले में आयोग के सदस्य ओमकार सिंह ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों पर बड़े गंभीर आरओ लगाए है उनका कहना था कि हमने जब स्कूल में औचक निरीक्षण किया तब हमने जिला शिक्षा अधिकारी,डीपीसी को बताया पर उनके द्वारा कोई ठोस कदम नही उठाया गया,साथ ही इस बात की जानकारी कोतमा तहसीलदार को दी गई पर उन्होंने भी यह कहा कि हम नायाब तहसीलदार को भेजते है पर वहां भी कोई इस मामले को गंभीरता से नही लिया और जांच के दौरान न तहसीलदार पहुंचे न नायाब तहसीलदार पहुंचे इससे ये साफ कहा जा सकता है की निश्चित तौर पर प्रशासन बिजुरी स्थित सेंट जोसेफ स्कूल के खिलाफ कार्यवाही करने से बच रहे है आखिर इस स्कूल को बचाने में प्रशासन क्यों आमादा है ,अब देखना यह है कि जब शिक्षा के मंदिर में ऐसे कृत्य हो रहे हो तो फिर उन बच्चों का भविष्य क्या होआ जिनके परिजन यहां अपने बच्चों का भविष्य सवारने के लिए यहां एडमिशन कराते हैं पर स्कूल के हालत देख कर यह तो साफ कहा जा सकता है कि इस स्कूल में।पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य चौंपट होना लाजमी है अब तय करना है यहां के अभिभावकों को अपने बच्चों के बारे में सोचने का वक्त आ गया है