क्रीड़ा परिसर–बराती–हिंडालको मार्ग का उड़ा परखच्चा
नया बना मार्ग ,अपने बदहाल हालात पर बहा रहा आंसू,,संवाददाता - श्रवण कुमार उपाध्याय 

अमरकंटक - मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक जो 
मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक तीर्थ स्थल पावन–पवित्र नगरी अमरकंटक में विकास कार्यों की हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है । नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत अमरकंटक–शहडोल–रीवा मुख्य मार्ग से वार्ड क्रमांक-2 बराती , वार्ड क्रमांक-3 एवं 4 हिंडालको तथा वार्ड क्रमांक-6 गुम्मा घाटी को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग आज बदहाली की मार झेल रहा है ।
करीब 5 से 6 वर्ष पूर्व निर्मित यह सड़क वर्तमान में जगह-जगह से उखड़ चुकी है । डामर की परत पूरी तरह समाप्त हो गई है और मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढों का जाल फैल गया है । हालात इतने खराब हैं कि दो-पहिया और चार-पहिया वाहनों का आवागमन भी जान जोखिम में डालकर करना पड़ रहा है । बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और भयावह हो जाती है , जिससे आए दिन वाहन फंसने और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है ।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों लोग गुजरते हैं जिनमें स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, कर्मचारी एवं पर्यटक शामिल हैं । बावजूद इसके सड़क की मरम्मत को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है । हालत यह है कि लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।
पांच वर्षों के भीतर ही सड़क की यह दुर्दशा यह स्पष्ट करती है कि निर्माण कार्य घटिया एवं अमानक स्तर का कराया गया होगा । बताया जाता है कि सड़क के आवश्यक रखरखाव, सुधार एवं पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की थी, किंतु जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया गया । सड़क की वर्तमान स्थिति देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि निर्माण में गिट्टी, मुरूम एवं डामर का उपयोग कितनी लापरवाही से किया गया होगा ।
उल्लेखनीय है कि यह मार्ग पवित्र नगरी अमरकंटक के मिनी स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों में शामिल था । योजना का उद्देश्य नगरी को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाना था, किंतु जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है । यह मार्ग आज स्वयं अपनी दुर्दशा की कहानी बयां कर रहा है ।
अब आवश्यकता है कि अमरकंटक के विकास कार्यों को धरातल पर उतारने वाले जिम्मेदार जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी इस दिशा में गंभीरता से संज्ञान लें । केवल कागजी विकास नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण, मजबूत एवं दीर्घकालिक विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।
भले ही विकास कार्यों की संख्या सीमित हो, लेकिन वे स्थायी और टिकाऊ हों—यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ऐसे दिखावटी और अल्पकालिक कार्यों से बचना आवश्यक है, जो समय के साथ नष्ट होकर धार्मिक एवं पर्यटन नगरी अमरकंटक की छवि को धूमिल करते हों ।
जनहित में इस जर्जर मार्ग के शीघ्र पुनर्निर्माण एवं दोषी ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की मांग स्थानीय नागरिकों द्वारा लगातार की जा रही है ।