निर्माणाधीन NH-43 पर ठेकेदार की लापरवाही से बड़ा हादसा,बिना संकेतक कटे मार्ग पर गड्ढे में गिरी बाइक, दो युवक घायल — एक की हालत गंभीर, रायपुर रेफर

उमरिया जिले में निर्माणाधीन NH-43मार्ग पर ठेकेदार की कथित लापरवाही एक बार फिर भारी पड़ गई। 18 फरवरी की रात्रि लगभग 9 बजे के आसपास मुदरिया के पास हुए सड़क हादसे में दो मोटरसाइकिल सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रशांत सिंह (पिता विनोद सिंह, उम्र 24 वर्ष) और अमित पाल (पिता भुवन पाल, उम्र 24 वर्ष), दोनों निवासी ग्राम देवरी थाना नौरोजाबाद, शहडोल से अपने घर लौट रहे थे। जैसे ही वे मुदरिया के पास पहुंचे, सामने से आ रहे वाहन की तेज रोशनी के कारण उन्हें सड़क पर चल रहे निर्माण कार्य का अंदाजा नहीं हो सका।
बताया जा रहा है कि सड़क के क्रैक भरने और मरम्मत कार्य के लिए मार्ग को काटकर वन-वे जैसा बना दिया गया था। लेकिन मौके पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड, न रिफ्लेक्टर, न बैरिकेडिंग और न ही कोई संकेतक लगाए गए थे। अंधेरे में बिना किसी इंडिकेशन के बाइक सीधे कटे हुए गड्ढे में जा गिरी और दोनों युवक सड़क पर गिर पड़े।
गंभीर चोटें, एक बेहोश अवस्था में
हादसे में दोनों युवकों को गंभीर चोटें आईं। अमित पाल बेहोशी की हालत में था। राहगीरों की मदद से दोनों को तुरंत पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने अमित पाल की गंभीर स्थिति को देखते हुए पहले शहडोल रेफर किया। शहडोल में हालत और बिगड़ने पर उसे रायपुर उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया गया।
11 वर्षों से अधूरा निर्माण, फिर भी दरारें
स्थानीय लोगों का कहना है कि NH-43 सड़क का निर्माण कार्य लगभग 11 वर्षों से जारी है, लेकिन अब तक पूर्ण नहीं हो सका है। आश्चर्य की बात यह है कि जहां-जहां सड़क बनी भी है, वहां कुछ ही समय में जगह-जगह से क्रैक पड़ चुके हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार एजेंसी  (एमपीआरडीसी) और संबंधित विभाग इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब है और सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण आए दिन लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं और कई अपनी जान गंवा चुके हैं।
ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उचित संकेतक, रिफ्लेक्टर और सुरक्षा व्यवस्था लगाई जाती, तो यह हादसा टल सकता था। प्रशासन से मांग की जा रही है कि संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, साथ ही निर्माण स्थल पर तत्काल सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं।
अब देखना यह है कि लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद भी जिम्मेदार विभाग चेतता है या फिर लापरवाही का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।