खनिज विभाग ने झूठ का पुलिंदा पेश कर मुख्यमंत्री व प्रदेश के सर्वोच्च सदन को किया गुमराह  
बिसाहूलाल के सवाल पर मुख्यमंत्री के जवाब से हुआ खुलासा
इन्ट्रो-जिले का सबसे भ्रष्ट विभाग खनिज विभाग अब अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए विधानसभा में भी झूठ बोलने लगा है यही नहीं अनूपपुर के भाजपा विधायक बिसाहू लाल के एक सवाल के जवाब में जिस तरह से खनिज विभाग ने खनिज मंत्री को गुमराह करते हुए गोलमोल जवाब दिया है उसकी चर्चा इस समय अनूपपुर में जोरों पर है और खनिज विभाग के गोलमोल गुमराह करने वाले जवाब को सुनकर हर कोई यही कह रहा है कि अवैध रेत खनन माफियाओं को बचाने के लिए खनन विभाग ने विधानसभा और मुख्यमंत्री तक को गुमराह किया है।

अनूपपुर। अनूपपुर भाजपा विधायक और प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री बिसाहू लाल सिंह एवं दिग्विजय सरकार के पूर्व खनिज मंत्री ने मध्य प्रदेश विधानसभा में जिले में हो रहे अवैध उत्खनन को लेकर सवाल किया जिसका गोल-मोल जवाब देते हुए खनिज विभाग ने मुख्यमंत्री तक को गुमराह करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जो इस समय जनता में चर्चा का विषय बना हुआ है बिसाहूलाल सिंह ने विधानसभा में सवाल पूछते हुए कहा कि क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला अनूपपुर में कितने रेत खदान वर्तमान में संचालित हैं तथा किन-किन रेत खदानों को किन-किन ठेकेदारों को लीज पर आवंटित किया गया है? रेत उत्खनन, परिवहन एवं रेत खदान आवंटित किये जाने की नियमावली उपलब्ध करावें। (ख) क्या जिले की समस्त नदियों में रेत की खदानें संचालित नहीं हैं किन्तु रेत तस्करों के द्वारा दिन-रात अवैध रूप से रेत तस्करी की जाती है? यदि हाँ, तो जिले के किन-किन नदियों में रेत खदान संचालित हैं, जिनमें रेत परिवहन का कार्य चल रहा है तथा जिले में अवैध रूप से रेत परिवहन करने वाले रेत तस्करों के खिलाफ रेत चोरी रोकने हेतु जिला प्रशासन की क्या योजना है तथा रेत तस्करों के खिलाफ प्रशासन के द्वारा क्या कार्यवाही की जायेगी? (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार जिले की जिन नदियों में रेत की खदानें घोषित नहीं है उनमें भी रेत ठेकेदारों के द्वारा ग्रामीणों को रेत लाने से परेशान किया जाता है। शासन द्वारा शासकीय कार्यों, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजनाओं के लिए गरीबों के द्वारा स्थानीय स्तर से रेत लाने पर ठेकेदारों के द्वारा डराया, धमकाया जाता है, उनके खिलाफ प्रशासन के द्वारा क्या योजना बनाई गई है? इस सवाल के जवाब में खनन विभाग द्वारा भेजे गए रिपोर्ट को प्रदेश के मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव) की तरफ से सदन की पटल पर जवाब दिया गया कि (क) जिला अनूपपुर में वर्तमान में स्वीकृत सहित संचालित 06 रेत खदानों की सूची संलग्न परिशिष्ट पर दर्शित है। जिला अनूपपुर की रेत खदान समूह से रेत खनन, परिवहन, भण्डारण एवं विक्रय करने हेतु ई-निविदा सह नीलामी के माध्यम से चयनित एम.डी.ओ. (माइन डेवलपर कम ऑपरेटर) अमन सेठी, निवासी उद्योग विहार, गुरुग्राम, हरियाणा को आवंटित किया गया है। रेत उत्खनन परिवहन एवं रेत खदान आवंटित किए जाने की नियमावली पूर्व से अधिसूचित, मध्यप्रदेश रेत (खनन, परिवहन, भण्डारण एवं व्यापार) नियम 2019 है। (ख) जी नहीं, जिले की समस्त नदियों में रेत खदानें स्वीकृत होकर वर्तमान आवश्यक औपचारिकता पूर्ण होने के उपरांत 06 रेत खदानें संचालित हैं, विवरण संलग्न परिशिष्ट पर दर्शित है। यह कहना सही नहीं है कि रेत तस्करों के द्वारा दिन-रात रेत की अवैध रूप से तस्करी की जाती है। जिले में रेत खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण की रोकथाम हेतु वन, राजस्व, पुलिस, परिवहन एवं खनिज विभाग द्वारा गठित टास्क फोर्स द्वारा संयुक्त निरीक्षण/जांच कर नियमानुसार निरंतर कार्यवाही की जाती है। (ग) जिले की सभी नदियों में रेत की खदान स्वीकृत होकर 06 रेत खदानें संचालित हैं। रेत ठेकेदारों के द्वारा ग्रामीणों को रेत लाने से परेशान करने जैसी स्थिति प्रकाश में नहीं आई है। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। इस तरह से देखा जाए तो जिला खनिज विभाग ने विधायक बिसाहू लाल के सवाल के जवाब में जिस तरह से सदन को गुमराह करने की कोशिश की है उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि जिला खनिज विभाग जिले के रेत माफियाओं को बचाने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है फिलहाल यहां पर विशेष उल्लेखनीय तथ्य है कि वर्तमान में खनिज मंत्रालय मुख्यमंत्री के पास है और खनिज विभाग अपने भ्रष्टाचार के कारनामों को छिपाने के लिए मुख्यमंत्री तक को गुमराह कर रहा है।
बंद हो चुकी है रेत की खदानें फिर क्यों झूठ बोला खनिज विभाग
जिला खनिज विभाग के रिपोर्ट के आधार पर विधानसभा के सदन में मुख्यमंत्री की तरफ से भाजपा विधायक के सवाल के जवाब में यह कहना कि जिले में 6 रेत की खदानें संचालित है सरासर गलत हैं। सदन के पटल पर यह जवाब 9 फरवरी को दिया गया लेकिन उसके पहले 1 फरवरी को ही ठेका लेने वाली कंपनी ने जिले से अपना काम बंद करते हुए बोरिया बिस्तर बांध लिया था। यहां पर यह भी बता दिया जाए की उक्त कंपनी ने तीन माह पहले ही जिले की खदान को सिलेंडर करने का आवेदन किया था जिसका उल्लेख खनिज विभाग ने अपने जवाब में कहीं नहीं किया है। खनिज विभाग का यह कहना कि जिले में 6 खदानें संचालित है यह भी सरासर गलत है जिले में मात्र दो खदानें ही ठेकेदार द्वारा चलाई जा रही थी और इसका भौतिक सत्यापन करने पर दूध का दूध और पानी का पानी भी हो सकता है। वही खनिज विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ठेकेदार द्वारा कागज पर 6 खदानें भले ही चलाई जा रही थी लेकिन खनन कार्य मात्र दो ही खदानों पर किया जा रहा था और उसकी टीपी कागज में कथित तौर पर संचालित अन्य चार खदानों के नाम पर काटी जा रही थी जिसके माध्यम से अवैध खनन को वैद्य बनाने का अपराधिक षड़यंत्र विभाग और अमन सेट्ठी के गुर्गे कर रहे थे। और इसमें भारी गोलमाल किया गया है जिस पर पर्दा  डालने के लिए खनिज विभाग झूठ बोल रहा है।