अपनी उपलब्धि गिना ने बताने के लिए संसद हिमाद्री सिंह के पास कुछ नहीं
मोदी की गारंटी ही एकमात्र सहारा
इन्ट्रो-कहां जाता है कि चाहे जितना आसमान में उड़ ले एक न एक दिन आपको जमीन पर आना ही पड़ता है और यह कहावत नेताओं पर भी लागू होती है। जनप्रतिनिधि बनने के बाद हवा में उड़ने वाले नेताओं को चुनाव आते ही जब जनता की अदालत में आना पड़ता है तो उसके सामने वैसे ही परेशानी खड़ी होती है जैसी परेशानी का सामना इस समय शहडोल संसद हिमाद्री सिंह को करना पड़ रहा है।
अनूपपुर। जैसे-जैसे लोकसभा का चुनाव नजदीक आता जा रहा है वैसे-वैसे शहडोल लोकसभा क्षेत्र की संासद हिमाद्री सिंह के 5 साल के कार्यों का आकलन भी किया जाने लगा है। सांसद हिमाद्री सिंह के 5 साल के कार्यकाल को देखा जाए तो लोकसभा में जाने के लगभग 3 साल तक का समय उन्होंने क्षेत्र की जनता से दूर रहकर क्षेत्र की जनता को अपने पति नरेंद्र मरावी के हवाले छोड़ दिया था जिसका परिणाम यह निकला की नरेंद्र ने ऐसा मकड़जाल फैलाया की ना चाहते हुए भी हिमाद्री को नरेंद्र को अपने राजनीति से दूर करना पड़ा और यह तनाव इस कदर बढ़ता गया कि अब खुद नरेंद्र मरावी लोकसभा में टिकट का ताल ठोकने लगे है। फिलहाल यहां बात हम सांसद हिमाद्री सिंह के 5 साल के कार्यकाल की करेंगे और इस 5 साल की समीक्षा के दौरान ऑठो विधानसभा की जनता के पास हिमाद्री सिंह को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि 5 साल के दौरान हिमाद्री सिंह कहां थी। फिलहाल जनता के इन सवालों का जवाब तो हिमाद्री सिंह के पास भी नहीं है क्योंकि उन्होंने जनता के कार्यों के लिए जिसको जिम्मेदारी दी थी वही अब विरोधी बनकर टिकट का दावेदार बन गया है। लेकिन यहां पर यह बेहिचक कहा जा सकता है कि हिमाद्री सिंह के सामने जनता द्वारा उठाए गए जितने भी सवाल किए जा रहे हैं उसके लिए नरेंद्र मरावी कम जिम्मेदार नहीं है।
मोदी के दम पर लड़ना चाहती है चुनाव
शहडोल संसद हिमाद्री सिंह से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछला चुनाव भी उन्होंने अपने पिता की विरासत की सियासत के साथ मोदी के नाम पर लड़ा था और विजयी हुई थी। और इस बार भी वह मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ेंगे और विजई होगी।  फिलहाल संसद समर्थकों की बातों को देखा जाए तो यह बातें इस तरह से लगती है जिस तरह से कोतमा कांग्रेस विधायक ने समर्थक भी विधानसभा चुनाव के पहले ताल ठोक रहे थे लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे पहले वही समर्थक दिलीप जायसवाल का नारा लगाते देखे गए थे। 5 साल तक क्षेत्र की जनता के बीच गधे के सर से सिंघ की तरह गायब सांसद हिमाद्री सिंह के समर्थकों का बड़बोला पन उनके लिए भारी पड़ सकता है। फिलहाल शहडोल संसद हिमाद्री सिंह के सामने लोकसभा क्षेत्र की ऑठो विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी का बूथ स्तर पर विशाल और मजबूत नेटवर्क और भारत सरकार के प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी ही चुनावी मैदान में उतरने के लिए एकमात्र सहारा है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता।
देना होगा 15 करोड़ का जवाब
5 साल के संसदीय कार्यकाल में 2 साल कोरोना के कारण सांसद निधि का भुगतान नहीं हुआ था लेकिन संसद हिमाद्री सिंह को 15 करोड रुपए की सांसद निधि मिली थी उक्त 15 करोड रुपए में से अब तक संसद हिमाद्री सिंह ने 14 करोड़ 70 लख रुपए खर्च कर चुकी है। अगर क्षेत्र में जनता की बात माने तो पानी के टैंकरों के अलावा सांसद निधि का कहीं कोई ना तो उल्लेख होता है और ना तो रिकॉर्ड है और यह टैंकर कहां किसको दिए गए हैं इसका भी अता-पता नहीं है लेकिन अगर यह कहा जाए की 14 करोड़ 70 लख रुपए खर्च करने के बावजूद सांसद हिमाद्री सिंह क्षेत्र की जनता के सामने अपनी उपलब्धि बनाने में नाकाम है तो इसके पीछे भी नरेंद्र मरावी के कमीशन के खेल को ही ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है। फिलहाल क्षेत्र की जनता तो यह कहती है कि हमने संसद हिमाद्री को चुना था नरेंद्र को तो 5 साल पहले ही नकार दिया था इसके बावजूद हिमाद्री सिंह ने अगर पूरी बागडोर नरेंद्र के हाथों में दे रखी थी तो इसकी जिम्मेदारी भी हिमाद्री पर ही बनती है। फिलहाल सूत्रों का तो यह भी कहना है कि इसी कमीशन के खेल में हिमाद्री के पारिवारिक समर्थकों करीबियों और नरेंद्र के करीबियों के बीच भी कई बार विवाद हो चुका है और यह विवाद ही वर्तमान तनाव का मुख्य कारण माना जाता है।