जनजातीय विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में 40 से अधिक शोध पत्रों का वाचन हुआ

जनजातीय विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में 40 से अधिक शोध पत्रों का वाचन हुआ
अमरकंटक। प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक, मध्य प्रदेश तथा इंडियन आर्ट हिस्ट्री कांग्रेस के संयुक्त तत्त्वावधान और विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के यथेष्ट मार्गदर्शन में आयोजित फोक एंड ट्राइबल एलिमेन्टस इन इंडियन आर्ट विषयक त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रो. के. डी. बाजपेई मेमोरियल लेक्चर के अंतर्गत सर्वप्रथम प्रो. के. डी. बाजपेई को श्रद्धासुमन समर्पित किया गया। इसके पश्चात संगोष्ठी के संयोजक प्रो. आलोक श्रोत्रिय ने प्रसिद्ध पुरातत्त्वविद और कला मर्मज्ञ प्रो. के. डी. बाजपेई के कर्तृत्त्व और व्यक्तित्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रो. श्रोत्रिय ने कहा कि प्रो. के. डी. बाजपेई बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति थे, जिनके नेतृत्व में अनेक पुरातात्त्विक स्थलों का उत्खनन् कराया गया तथा उनके द्वारा प्राचीन भारतीय कला और पुरातत्त्व से संबन्धित भारतीय मुद्रा शास्त्र का अध्ययन तथा एतिहासिक भारतीय अभिलेख जैसी अनेक कृतियों का प्रणयन किया जो इतिहास जगत को बहुमूल्य देन है। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. ब्योमकेश त्रिपाठी ने उक्त मेमोरियल लेक्चर के अन्तर्गत व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि उड़ीसा की जनजातीय कला में जोग वुडन आर्ट, कोंध वुड कार्विंग, संताल वाल पेन्टिंग, सोरा कला एवं टेटू इत्यादि की समृद्धशाली परम्परा रही है। संगोष्ठी के दूसरे दिन तीन सामानान्तर तकनीकी सत्र चलायें गये जिसमें चालीस से अधिक शोध पत्रों का वाचन हुआ, जिसमें डॉ कानितकर ने डेलमाल के लिम्बोजी माता मन्दिर, डॉ जे. सुमाठी ने फोक कल्चर एंड आर्किटेक्चर आफ फिसर फोक इन कांचीपुरम तथा प्रो. पारोमिता दास ने फोक एलिमेन्टस इन द स्कलपचर आफ आसाम विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त डॉ नूर बानो, डॉ सर्वमंगला, डॉ आरती अय्यर, डॉ अर्नब चटर्जी, इत्यादि ने भी अपने शोध पत्रों का वाचन किया। संगोष्ठी के अन्त में सांयकाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ जिसमें कलाकारों ने प्रस्तुति से सभागार में उपस्थित जनों का मनमोह लिया। इस अवसर पर प्रसिद्ध कलाविद प्रो. मारुति नन्दन तिवारी, प्रो. ए. पी. जामखेड़कर, प्रो. डी. एस. सोमशेखर, डॉ चूणामणि नन्दगोपाल, प्रो. श्रीनिवास पाडिगर, डॉ एस. एस. सिन्हा, डॉ शिवा कान्त बाजपेई, माननीय कुलपति के विशेष कर्तव्याधिकारी डॉ विजय नाथ मिश्र, विभागाध्यक्ष डॉ मोहन लाल चढ़ार, डॉ शिवा कान्त त्रिपाठी, डॉ जिनेन्द्र कुमार जैन, डॉ जनार्दन बी., डॉ मनोज कुमार, आदिल, नीरज कुमार, संग्राम सिंह, सत्यम दुबे, रजत सिंह, इदित दावा, नागेन्द्र शुक्ला, हेमन्त कुमार, पंकज पेन्ड्रो, ललिता लाहड़ी, शिवांगी सिंह, पूनम इत्यादि तथा बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्रा उपस्थित रहे।