लोकसभा चुनाव को लेकर शहडोल संसदीय क्षेत्र में बढ़ी सियासी सरगर्मी! क्या भाजपा हिमाद्री पर दोबारा दांव लगाएगी ?
शहडोल संसदीय क्षेत्र में 1957 से लेकर अब तक 17 बार लोकसभा का चुनाव हो चुका है इस दौरान अनूपपुर जिले की पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र के दलपत सिंह परस्ते जहां पांच बार सांसद रहे वही दलबीर सिंह तीन बार तो वही उनकी धर्मपत्नी राजेश नंदिनी सिंह एक बार और उनकी बेटी हिमाद्री सिंह भी एक बार यहां से सांसद चुनी गई है। इस बार फिर चुनावी शोर में पुष्पराजगढ़ क्षेत्र से ही कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों के आमने-सामने होने की चर्चा है। फिलहाल टिकट किसको मिलेगा अभी यह स्पष्ट नहीं है लेकिन यह तय माना जा रहा है कि 2024 में शहडोल का सांसद चाहे जो हो वह अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र का ही निवासी होगा।इस बार बीजेपी कांग्रेस दोनो दलों में उम्मीदवार बदलने के कयास लगाए जा रहे।

 देश में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीति अब करवट लेने लगी है लोकतंत्र के सबसे बड़े महा यज्ञ के लिए प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो गई है वहीं दूसरी सियासी दलों के क्षत्रपों द्वारा उम्मीदवारी के मद्देनजर माथा पच्ची  भी शुरू कर दी गई जाहिर है ये देश तो चुनाव के लिए जीता है और चुनाव के लिए मरता है चुनावी तैयारियों की तस्वीरें नजर आने लगी है इस कड़ी में शहडोल संसदीय क्षेत्र में भी सियासी ताने-बाने बुने जाने लगें भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों द्वारा लोकसभा चुनाव की सियासी बयार अपने पक्ष में करने के लिए कमर कस रहे हैं स्मरणीय है कि शहडोल संसदीय क्षेत्र में मौजूदा वक्त पर भाजपा का कब्जा है और भाजपा दोबारा उक्त संसदीय क्षेत्र में विजय परचम लहराने हर संभव कोशिश करेगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा और उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल चुनावी दौरा कर 24 के चुनावी महाभारत का संखनाद भी कर दिया है भाजपा द्वारा लोकसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर चुनाव प्रभारी की नियुक्ति भी कर दी गई है। यही नही शहडोल में लोकसभा चुनाव कार्यालय का शुभारंभ भी किया जा चुका है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की हांफती राजनीतिक में सियासी हलचल बढ़ गई और बैठको का दौर शुरू हो चुका है। शहडोल संसदीय क्षेत्र के इस साह और मात के खेल में दो बड़े सवाल लोगों के जहन में घुमणने लगे हैं इस सवालों के साए तले लोगों के बीच कयासों का दौर भी शुरू हो गया है।
भाजपा में हिमाद्री के अलावा और कौन? 
क्या भाजपा हिमाद्री सिंह के नाम पर उम्मीदवारी के ईर्द-गिर्द अंतिम मुहर लगाएगी या फिर नया उम्मीदवार लेकर आएगी ये वो सवाल है जो गली मुहल्लों चैराहों पर चर्चा का विषय बना हुआ है स्मरणीय है कि शहडोल संसदीय क्षेत्र में भाजपा के उम्मीदवारों के नामों की फेहरिस्त में कई नाम गोते लगा रहे हैं अगर भाजपा सूत्रों की मानें तो एक नेता उम्मीदवार बनने का सपना संजोए दिल्ली दरबार की यात्रा भी कर चुके हैं वैसे भी अगर आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा से चुनावी मैदान में संभावित  नेताओं के नामों पर गौर किया जाए तो राम लाल रौतेल, हीरा सिंह श्याम, जय सिंह मरावी, रामदास पुरी, सुदामा सिंह, नरेन्द्र मरावी ये नेताओं के नामों की वो फेहरिस्त है जिनके नामों पर भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारी के इर्द-गिर्द संभावना तलाश सकती है ऐसे में भाजपा हाई कमान चुनाव में जनता के बीच नये चेहरे पर दांव लगाती है या फिर वर्तमान सांसद हिमाद्री सिंह पर दोबारा जनता के पास जनादेश लेने भेजती है ये देखना बेहद दिलचस्प होगा बताया जाता है कि वर्तमान सांसद हिमाद्री सिंह स्वयं दिल्ली के भाजपा के सियासी गलियारे में अपने उम्मीदवारी की बिसात बिछाकर भाजपा से दोबारा उम्मीदवार बनने के लिए जद्दोजहद कर रही है। भाजपा आलाकमान का विष्वास वो अपनी इस विसात के आप पास जीतने में कहा तक सफल हो पातीं है ये तो नहीं मालूम लेकिन हिमाद्री सिंह की सियासी लकीर के इस पार या उस पार अगर देखा जाए तो स्पष्ट दिखाई देता है कि हिमाद्री एक यूवा और निर्विवाद छवि की जनप्रतिनिधि हैं सत्ता पक्ष का सांसद होने के बाद भी उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा है लेकिन दूसरी तरफ अगर उनके बीते 5 वर्षों कार्यकाल के पन्नों को एक एक कर पलटना शुरू किया जाए और सियासी पैमानों से जोड़कर देखा जाए तो निष्क्रियता की मोटी लकीर जहन में खिंचती चली जाती है और अगर बात संसदीय क्षेत्र में जनसरोकार से जुड़ी उनकी उपलब्धियों की जाए तो शहडोल नागपुर ट्रेन के आलावा कोई बड़ी उपलब्धि है नहीं। बहरहाल भाजपा किसे अपना उम्मीदवार आगामी लोकसभा चुनाव में बनाएगी ये तो नहीं मालूम लेकिन अगर हम राजनीतिक पंडितों की मानें तो वर्तमान राजनीतिक माहौल के आसरे भाजपा से किसी भी चेहरे की चुनावी नैया पार हो सकती है।
कांग्रेस में फुन्देलाल कर सकते है कमाल 
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से 2019 की उम्मीदवार प्रमिला सिंह की जगह पुष्पराजगढ़ विधायक या फिर उनके पुत्र की उम्मीदवारी लगभग तय मानी जा रही है। 24 के आगामी लोकसभा चुनाव में शहडोल संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस विजय परचम कैसे लहराएगी एक बड़ा सवाल है स्मरणीय है कि कांग्रेस के जमीनी संगठन की नब्ज को अगर टटोला जाए तो संगठन की जमीन खुरदुरी बंजर है कार्यकर्ताओं के बीच आपस में ही गोलबंदी है। शहडोल संसदीय क्षेत्र की जनता का जनमत देकर देश की सबसे बड़ी पंचायत में किसे भेजती है ये देखना होगा। अगर कांग्रेस के जमीनी हकीकत की पड़ताल की जाए तो शहडोल संसदीय क्षेत्र में बस एक ही नाम फुन्देलाल का सामने आता है। जो आगामी विधानसभा चुनाव में  भाजपा के सामने कड़ी चुनौती दे सकते है। फिलहाल कांग्रेस के कई अन्य दावेदार भी सामने है लेकिन सच यही है कि फुन्देलाल के अलावा किसी अन्य चेहरे पर दाव लगाना कांग्रेस को भारी पड़ सकता है।