भोपाल । मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने आज जारी अपने वक्तव्य में कहा कि ई-टेंडरिंग घोटाला, मध्यप्रदेश के इतिहास में हुए, अब तक के सबसे बड़े घोटालों में से एक है और इन ई-टेंडरों की समूची प्रक्रिया में, तत्कालीन भाजपा सरकार के संरक्षण के चलते अधिकारियों ने मंत्रियों और भाजपा नेताओं के चहेतों को बेजा लाभ पहुंचाने के लिए तरह-तरह की छेड़छाड़ की। इस मामले में हुई एक पूर्व मंत्री के निज-सहायकों निर्मल अवस्थी और वीरेन्द्र पांडे की गिरफ्तारी से यह तय हो गया है कि कांग्रेस पार्टी की कमलनाथ सरकार, अपने वचन-पत्र में ई-टेंडरिंग घोटाले के दोषियों को सजा दिलाने के अपने वचन के प्रति प्रतिज्ञाबद्ध है और वह प्रदेश की जनता को यह विश्वास दिलाती है कि इस घोटाले के द्वारा, जनता की गाढ़ी कमाई के पैसों से भ्रष्टाचार के महल खडे करने वाले रसूखदारों और बड़ी मछलियों को भी किसी हाल में बख्शा नहीं जायेगा।
भाजपा की पिछली प्रदेश सरकार की कार्यशैली और मंशा पर उक्त गंभीर आरोप लगाते हुए श्रीमती ओझा ने आगे कहा कि आर्थिक अपराध शाखा ने बेहद लचर रवैया अपनाते हुए प्रारंभिक जांच में ढीलाई बरती गई और पूरे घोटाले को ‘‘मैनेज’’ करने के लिए इस जांच में चहेते अधिकारियों की नियुक्तियां भी की गईं। इस घोटाले की विशालता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी सहित, सभी विपक्षी दलों और मीडिया द्वारा पूरे घोटाले को लगभग 30000 करोड़ रूपये का होने का अनुमान जाहिर किया गया था।
श्रीमती ओझा ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर अनुमानित इस घोटाले से साफ है कि यह घोटाला निचले स्तर के अधिकारियों के बूते की बात नहीं थी। इस मामले में निश्चित ही ‘‘सत्ता के शीर्ष लोग’’ भागीदार रहे होंगे, अपने दो निजी सहायकों की गिरफ्तारी से बौखलाये पूर्व मंत्री और भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा की इस मामले में व्यक्त की गई प्रतिक्रिया बिल्कुल ‘‘चोर की दाढ़ी में तिनका’’ जैसी है, फिर भी उनका यह कहना बिल्कुल ठीक है कि इस मामले में अभी छोटी मछलियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन वे आश्वस्त रहें कि प्रदेश में अब कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की ईमानदार सरकार है और उसकी जांच एजेंसिया पूर्ण निष्पक्षता से काम करते हुए, इस गंभीर घोटाले में शामिल बड़ी से बड़ी मछलियों को भी बख्शने वाली नहीं हैं।