पटना ।  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि चिराग हमारे साथ क्यों नहीं है, इसका जवाब तो वही दे सकते हैं, लेकिन मैं पहले रामविलास पासवान जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्होंने कहा कि साथी जाने का दुःख भी होता है और नुकसान भी, लेकिन जब आपके हाथ में बात न हो तो क्या किया जा सकता है।
एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा कि जहां तक बीजेपी-जेडीयू-एलजेपी के गठबंधन का सवाल है, बीजेपी और जेडीयू दोनों की ओर से एलजेपी को उचित संख्या में बार-बार सीटों की पेशकश की गई। सीटों को लेकर कई बार बातचीत भी हुई। मैंने व्यक्तिगत रूप से कई बार चिराग से बात की। लेकिन बात नहीं बनी।
सीटों को लेकर चिराग पासवान से वार्ता विफल होने के पीछे का कारण बताते हुए अमित शाह ने कहा, "इस बार हमारे पास गठबंधन के नए सदस्य हैं, इसलिए प्रति पार्टी सीटों की संख्या नीचे जाने के लिए बाध्य थी। जेडीयू और भाजपा ने भी कुछ सीटें छोड़ दीं। लेकिन ऐसा एलजेपी के साथ नहीं हो सका।"
शाह ने आगे कहा कि एकतरफा टिप्पणियां भी की गईं, जिसका नतीजा पार्टी कार्यकर्ताओं पर दिखाई दिया, इसलिए उनका एक खेमे में रहना मुश्किल हो रहा था। हालांकि, उसके बाद भी हमने गठबंधन नहीं तोड़ा, उन्होंने ऐसा करने की आधिकारिक घोषणा की।' इन चुनावों के बाद लोजपा एनडीए में वापस आ सकती है, इस सवाल पर शाह ने कहा कि "बिहार के लोग समझते हैं कि गठबंधन क्यों और किसके कारण टूटा था। हम चुनाव के बाद देखेंगे कि क्या एलजेपी एनडीए में शामिल होती है। हम अभी विरोधी हैं और उसी के अनुसार चुनाव लड़ेंगे।