बिजुरी जो भी हुआ राजनीति का काला दिन था 
अनूपपुर - हंगामा है क्यों बरपा जब सभी को पता है कि विधायक की कुर्सी न तो नगर अध्यक्ष को मिल सकती है और न नगर अध्यक्ष की कुर्सी विधायक महोदय को
कहावत है दुश्मनी वहां तक हो जहां कभी हम एक दूसरे के सामने हो तो आंखे न चुरानी पड़े,नेता तो स्वर्गीय दलवीर सिंह थे,नेता तो स्वर्गीय राजेश नंदनी थी पर कभी न किसी ने राजनीत की आड़ में अपनी रोटी सेंकती देखी होगी या राजनीत को दूषित करते सुना होगा और शहडोल संभाग के लिए दोनों राजनेता सैदव सर ऊंचा करने वाली राजनीत करते थे पर न जाने अनूपपुर जिले की राजनीति को किसकी नजर लग गई,बिजुरी नगरपालिका में जो भी हुआ राजनीति में काला दीन है किसकी गलती थी किसकी नही थी हमे उस पे जाना नही पर जो भी हुआ वो नही होना चाहिए था पर हुआ है
दरसल सम्मान जैसी चीज को इन नेताओं ने अपने पैर की जूती समझ ली  हम यूँ ही सम्मान की बली चढ़ते नही देख रहे कई वर्षों से इसकी नीव पड़ती जा रही थी और अब ऐसी दीवारें खड़ी हो रही है कि कौन नेता किसको कितना नीचा दिखा सकता है इसकी होड़ मची हुई है
दरसल स्वर्गीय दलवीर सिंह के रहते इन नेताओं की मजाल नही थी कि खून उबाल मारे पर उनके रुखसत हो जाने के बाद इसे संभाले रखने की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री वर्तमान विधायक अनूपपुर बिसाहुलाल सिंह के कंधों पर थी और उन्होंने उसे निभाने का भरसक प्रयास भी किया उसका उदाहरण वर्तमान में पुष्पराजगढ़ विधायक फुन्देलाल सिंह,और कोतमा विधायक सुनील सराफ है जिन्हें बिसाहुलाल सिंह ने राजनीति में हर तरह से बढ़ाने का प्रयास किया पर बदलती राजनीत और स्वार्थों ने अपने रंग दिखाने शुरू किए और वर्तमान में दोनों बिसाहुलाल से इतर अपनी राजनीति में सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी बिसाहुलाल सिंह को समझते है जिसका नतीजा साफ तौर पर सरकार बनने के बाद दिखाई दिया कि आपसी खींचतान की वजह से एक भी मंत्री अनूपपुर को मयस्सर न हो सका तो 
दूसरी तरफ बिजुरी नगरपालिका की घटना ने बता दिया कि जिले वासियों को राजनेताओं के भरोशे नही रहना चाहिए ये अपना जलवा दिखाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है 
विवादों की वजह जो भी रही हो पर ये अच्छा नही था एक तरफ जहां नगरपालिका के जिम्मेदारों को एक विधायक के सम्मान का ख्याल रखना था तो उससे ऊपर उठ एक विधायक को भी उन नवयुवाओं के सम्मान का ख्याल रखना था जिस तरह के वीडियो वायरल हुई उसमे साफ दिखा की यहां तो इस बात की लड़ाई मची थी कि कौन किसको गालियां बक सकता है कौन किसको सलाखों के अंदर पहुंचा सकता था माना कि आज आप नगरपालिका के पद पर विराजमान है और आप विधायक के पद पर विराजमान है पर आप दोनों ने जो मिशाल जनता को दिखाई कही भी काबिले तारीफ नही थी 
क्या आप सभी राजनेता हमेशा के लिए कुर्सी पर विराजमान हो गए है क्या इससे नीचे कभी नही आएंगे और आएंगे तो क्या कभी आप सब एक दूसरे के सामने नही आयेंगे आएंगे पर बस नजरे चुराते हुए अगर नगरपालिका परिषद में कुछ गड़बड़ी थी तो आप भी विधायक है और सरकार आप की बिना विवाद भी इस मसले को सुलझाया जा सकता था पर आप भी सिंघम बनने में जुटे है तो दूसरी तरफ नगरपालिका के जिम्मेदारों को भी ये बात समझनी थी कि क्षेत्र का विधायक है पर किसी के समझ मे नही आया या समझना नही चाहते थे पर ये पब्लिक है सब जानती है 
वैसे तो राजनीति इसी का नाम है कभी बिसाहुलाल सिंह भी इनके सब कुछ थे पर आज बिसाहुलाल सिंह आज इनके आंखों की किरकिरी बन गये है 
एक दौर वो भी देखा है लाख प्रतिद्वंदिता रही हो राजनीत में रामलाल रौतेल और बिसाहुलाल सिंह के बीच पर जब भी दोनो एक दूसरे के सामने आए दोनो ने एक दूसरे के सम्मान में कभी कोई कमी नही छोड़ी एक तरफ जहां रामलाल रौतेल ने हमेशा झुक कर बड़े होने के नाते बिसाहुलाल सिंह का सम्मना किया तो बिसाहुलाल सिंह ने रामलाल को गले लगाते हुए छोटे भाई की तरह सम्मना दिया जो सुखद पहलू है 
आप सभी राजनेताओं से यहां की जनता सिर्फ यही चाहती है कि क्षेत्र का विकास करें न करें आप जनप्रतिनिधि पर कम से कम इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे कर जिले के मुँह में कालिख न पोतें यही तोहफा हमारे लिए जिले का सबसे बड़ा विकाश होगा 
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है,जिले की शिक्षा व्यवस्था बद से बदतदर हो चली है,जुंए,सट्टे,कबाड़,अवैध उत्खनन परिवहन जैसे कई भृष्टाचार चरम पर है जरा इधर भी गौर किजिये आप मे लड़ने का वक्त ही नही मिलेगा लड़ना है तो इन भृष्टाचारों से लड़ कर दिखाइए क्यों कि अक्सर आरोप यही लगते रहे है की सफेदपोश नेताओं के संरक्षण में ये सब फल फूल रहे है और अगर इसमे थोड़ी भी सच्चाई है तो कृपया कवच बनना छोड़ें और जिले को इससे मुक्ति दिलायें जिससे जिले का भला हो सके आपस मे लड़ने से किसका भला हुआ है एक उदाहरण हो तो राजनेता जरूर बताएं