इहां कुम्हड बतिया कोउ नाहीं....
पत्रकारों को धमकाओ मत साहब.
@अजीत मिश्रा 
तीन दिन से सोशल मीडिया पर शहडोल के दो धुरंधर नामचीनों के बीच घटे वाकये का आडियो तथा इनमें से एक द्वारा लिखित मैटर शेयर किया गया है। एक हमारे वरिष्ठ पत्रकार बन्धु हैं ,जिनका पत्रकारिता का लंबा रिकार्ड है। तो दूसरी ओर शहडोल कांग्रेस से जुडे , नामचीन व्यवसायी हैं। जो किसी ना किसी कारण से सुर्खियाँ बटोरते रहे हैं। 
किसी नाले को भाठनें, उस पर अतिक्रमण करने की घटना पर पत्रकारों ने इस पर कार्य किया , मामले के एक पक्ष ये नामचीन महोदय भी रहे होंगे । आडियो सुनें तो यह तो पता चलता है कि दोनो ही पुराने परिचित / मित्र हैं। यह परिचय घरेलू है या व्यावसायिक या सामान्य ,स्पष्ट नहीं । लेकिन जिस तरह से समाचार को लेकर दो पक्षों मे बात हो रही है ...यह तो स्पष्ट है कि इस आडियो मे कहीं भी पत्रकार महोदय ने धन की मांग नहीं की। यह जरुर कहा है कि बडा मामला है , एपिसोड चलेगा । अर्थात किस्तों मे , धारावाहिक समाचार चलेगा। 
    इस बातचीत से नामचीन ऐसे उखडे कि उन्होंने पहले संबध खराब होने ,संबध खत्म कर लेने का भावनात्मक दबाव दिया। जिसे पत्रकार ने हंसकर सहजता से टाल दिया । जब संबधों का भावनात्मक पांसा सही नहीं पडा तो महोदय ने सीधे आरोप लगा दिया कि पैसॆ नही मिले इसलिये समाचार छापने की बात की जा रही है। अगले व्यक्ति ने पत्रकार पर आरोप लगा दिया कि आपकी बात चीत का यही आशय है कि आपको विग्यापन नहीं मिला, पैसा नहीं मिला इसलिये समाचार छापने की बात की जा रही है। अब महोदय इस पर भी नहीं रुके , उन्होंने पत्रकार को नोटिश देने, शिकायत दर्ज कराने तक की धमकी दे डाली। कहा आप तो अपनी पूरी उम्र तक मेरे खिलाफ लिखो । जो होगा हम देख लेगें।
  कहां बेचारा गरीब बेबस नौकरीपेशा पत्रकार ....कहां सर्वशक्तिमान साधन संपन्न सत्तारूढ़ दल के नेता। ऐसी धमकी से तो कोई भी डर जाएगा। डर पैदा करके आप नाले पर क्या , कहीं भी कब्जा कर लो । धन है, बाहुबल है, शक्ति है  ...सब कुछ है जो आपको अजर अमर बनाता है। बेचारा पत्रकार आपका क्या कर सकता है ....ज्यादा से ज्यादा दो - चार - छ: समाचार की सचित्र धारावाहिक छाप कर जनता को ,प्रशासन को आपकी करतूत ही तो बतलाएगा । उससे आपका बाल भी बांका नहीं होगा। अब जब अभी तक नहीं हुआ है ,तो आगे भी कोई आपका क्या कर लेगा ?? 
इसलिये महोदय से हम तो अनुरोध ही कर सकते हैं कि नाला हो ,नाली हो ,जमीन हो ,जंगल हो आप अपना कार्य बदस्तूर करते रहें ,पत्रकारों को उनका कार्य करने दें। खानदानी लोगों को ऐसे कार्य करते रहने की पूरी आजादी है,बेखॊफ करते रहें।निरीह  पत्रकारों को धमकी - वमकी देना आप जैसे नामचीनों को शोभा नहीं देता। यहाँ तो गनीमत है कि महोदय ने फोन पर ही धमकाकर कलेजा ठंडा कर लिया ,अन्यथा बहुत से नामचीन तो गाडी से धक्का मरवा देते हैं, अपने सुपारी छर्रों से पिटवा देते हैं या मरवा भी देते हैं। अब पत्रकारों कॊ डर कर लिखने पडने की आदत डाल लेना चाहिए ।
& हां , मोबाइल या कपडों मे हिडन कैमरा , काल रिकार्डर जरुर चालू रखें । क्या पता कब कहां किस नामचीन के पाजामे का नाडा खींचने की जरुरत आ पडे।