बॉलीवुड में ऐसी कई फिल्में भी बनी हैं जिसने लोगों को पानी की किल्लत और सूखे को लेकर आगाह करने का भी काम किया गया है। आमिर खान की फिल्म लगान में बारिश की कमी को दर्शाया गया था। ब्रिटिश काल पर आधारित इस फिल्म का निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था। फसलों की उपज के लिए पर्याप्त वर्षा ना होने से आमिर अंग्रेजों के साथ क्रिकेट खेलते हैं जिस खेल के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं होता है। शर्त यह होती है कि अगर आमिर की क्रिकेट टीम जीत गई तो उनका लगान माफ हो जाएगा और नहीं जीती को उन्हें दोगुना लगाना देना पड़ेगा।
कौन कितने पानी में 2015 में रिलीज हुई कौन कितने पानी में का निर्देशन नील मधाब पांडा ने किया था। फिल्म की कहानी जल संकट पर आधारित थी। इस फिल्म में जो दिया गया था कि अगर समय रहते पानी के बचाव को लेकर नहीं सोचा गया तो आने वाली पीढ़ी को पानी नहीं मिलेगा। इसमें कुणाल कपूर, राधिका आप्टे, सौरभ शुक्ला और गुलशन ग्रोवर जैसे सितारों ने काम किया था।
जल- कच्छ के रण बैकग्राउंड पर बनी जल फिल्म में पानी की कमी होने वाली परेशानी को दिखाया गया था।
वहां पर ऐसी स्थिति है कि कई बार तो पानी के लिए लोग मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। पूरब कोहली ने इस फिल्म में बक्का का किरदार निभाया थ। बक्का को फिल्म में पानी का देवता कहा जाता है क्योंकि वो जमीन पर कान लगाकर सुनकर बताता है कि कहां पर खुदाई करने से पानी निकलेगा।
वेल डन अब्बा- फिल्म की कहानी हैदराबाद के पास एक छोटे से गांव पर आधारित है। यह फिल्म 2010 में रिलीज हुई थी और इसे श्याम बेनेगल ने निर्देशित किया था। फिल्म में बोमन ईरानी ने अरमान अली का किरदार निभाया था जो पानी के संकट से जूझ रहे गांव में रहता है।
वह सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर एक कुआं बनवाना चाहता है पर उसे सरकारी ऑफिस से पैसे लेने कि लिए इतने लोगों को रिश्वत देनी पड़ती है कि उसके हाथ में चंद पैसे ही आते हैं और वह कुआं नहीं बनवा पाता है।
कड़वी हवा-फिल्म की कहानी दो ज्वलंत मुद्दे जलवायु परिवर्तन से बढ़ता जलस्तर और सूखा के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में एक तरफ सूखाग्रस्त बुंदेलखंड है तो दूसरी तरफ ओडिशा के तटीय क्षेत्र है जहां बारिश के दिनों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। 2017 में रिलीज इस फिल्म में संजय मिश्रा और रणवीर शौरी ने काम किया था।