अशोकनगर । खालसा पंथ के साजना दिवस बैसाखी के समापन अवसर पर रविवार को गुरुद्वारे में विशेष दीवान सजाया गया और गुरु के अटूट लंगर का आयोजन हुआ। इस अवसर पर गुरुद्वारे में छबील सेवा भी बरती गई। वहीं दोपहर के समय स्थानीय संजय स्टेडियम में गतका (सिक्ख मार्शल आर्ट) का आयोजन किया। 
रविवार को सुबह गुरुद्वारों में मत्था टेका। शबद-कीर्तन के बाद गुरु प्रसाद रूपी लंगर में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर गुरुद्वारा में दीवान सजाया गया और लंगर का आयोजन हुआ। सुबह 10 बजे से लगभग 2 बजे तक विशेष दीवान सजाया गया। साथ ही अटूट लंगर बरता गया। वहीं दोपहर 2 बजे से शहर के संजय स्टेडीयम में गतका कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें हजूरी रागी जत्था केज्ञानी द्वारा हैरतंगेज करतब करतब दिखाए गए। साथ ही कबड्डी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया एवं मुंगावली विधायक ब्रजेन्द्र सिंह यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
पर्व मनाने की ऐसी है मान्यता:
आमतौर पर यह पर्व बैसाखी पंजाब में किसानों का त्योहार है। रबी फसल तैयार होने की खुशी में पंजाब के किसान गिद्दा-भांगड़ा कर इस त्यौहार को मनाते हैं। गुरुसिंह सभा गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के धर्म प्रचार समिति ने बताया कि सन 1699 में बैसाखी वाले दिन दशम गुरु गोविंद सिंह ने धर्म, समाज व संस्कृति की रक्षा के लिए आनंदपुर साहिब में खंडे बांटे की पाहुल तैयार कर पंज प्यारों को अमृत पान छकाया और फिर खुद अमृत छका। उनके द्वारा खालसा पंथ की स्थापना की गई। सिक्ख पंथ के लिए ऐतिहासिक घटना अकाल पूरब की फौज का जन्म हुआ, इस दौरान इतिहास में नया मोड़ आया। इस पर्व को खालसा अकाल पूरब की फौज, प्रगटेव खालसा परमातम की मौज से समझा जा सकता है। इसकी खुशी स्वरूप बैसाखी मनाई जाती है।