इतनी सदियां बीत जाने पर भी चाणक्य के नीति शास्त्र की बातें आज भी प्रासंगिक मानी जाती है। चाणक्य ने अपने ग्रंथों में कहा है कि घोर संकट आए लेकिन यदि 3 लोग आपके साथ खड़े हैं तो आपको घबराने की जरूरत नहीं क्योंकि इन 5 लोगों का साथ आपके लिए सबसे बड़ी ताकत देता है और आपको सफल होने से कोई रोक नहीं सकता है।
श्लोक

संसारातपदग्धानां त्रयो विश्रान्तिहेतवः।

अपत्यं च कलत्रं च सतां संगतिरेव च॥- चाणक्य नीति

1. पत्नी का साथ : घोर संकट में पत्नी का साथ तब बहुत महत्वपूर्ण होता है जबकि वह समझदार भी है। संस्कारी और समझदारी पत्नी या पति सुख दुख में एक दूसरे के साथ देने के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं। यदि पति को पत्नी का साथ मिलता है तो संकट का समाधान भी तुरंत ही हो जाता है।

2. संतान का साथ : यदि सकंट काल में संतान आपके साथ नहीं खड़ी है तो फिर दुख के बादल और भी ज्यादा गहरा जाते हैं। ऐसी कई संतानें हैं जो पिता को समझती नहीं है और संकट काल में साथ देने के बजाए संकट काल के लिए पिता को ही जिम्मेदार ठहराकर भला बुरा कहने लगती है। जो बच्चे माता पिता की भावनाओं को समझकर उनका साथ देते हैं उन माता पिता पर कभी संकट नहीं आते हैं।

3. मित्र का साथ : संकटकाल में यदि आपका मित्र आकर खड़ा हो जाए तो उससे बड़ी कोई ताकत नहीं। अच्छी संगत से ही अच्छा मित्र पा सकते हैं। अच्‍छी संगत हमें कई तरह के बुरे संकटों से बचा लेती है और बुरी संगत से व्यक्ति संकटों में ही घिरा रहता है। कहते हैं कि सज्जनों की संगति से जीवन में कोई संकट नहीं आता है और यदि आता भी है तो उसका तुरंत ही समाधान हो जाता है।