ईरान में टॉप सैन्य कमांडरों की छुट्टी! खामेनेई ने किए बड़े बदलाव
तेहरान: अमेरिका के साथ जारी तनाव और बढ़ते सैन्य दबाव के बीच ईरान ने अपनी शीर्ष सैन्य कमान में एक बड़ा और अहम फेरबदल किया है। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने देश के सुरक्षा और रक्षा ढांचे को मजबूत करते हुए सशस्त्र बलों के नए चीफ ऑफ स्टाफ और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नए कमांडर सहित कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं।
मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही बने सशस्त्र बलों के नए चीफ ऑफ स्टाफ
खामेनेई के कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही को ईरान के सशस्त्र बलों का नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया गया है। इस पद को संभालने से पहले वे खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। यह प्रमुख संस्थान ईरान की सेना की विभिन्न शाखाओं के बीच सैन्य अभियानों और रणनीतिक गतिविधियों के समन्वय में बेहद अहम भूमिका निभाता है। हाल के दिनों में उनका रुख अमेरिका और उसके सहयोगियों के प्रति काफी आक्रामक रहा है, और उन्होंने क्षेत्रीय देशों को चेतावनी दी थी कि यदि कोई देश अमेरिका का सैन्य कवच बनता है, तो वह भी संघर्ष की चपेट में आ सकता है।
ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी को मिली आईआरजीसी की कमान
इसके साथ ही, ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का नया कमांडर नियुक्त करते हुए उन्हें मेजर जनरल के पद से नवाजा गया है। वाहिदी लंबे समय से ईरान के सैन्य और सुरक्षा तंत्र के एक बेहद प्रभावशाली और कड़े रुख वाले चेहरे रहे हैं। ऐसे समय में जब देश युद्ध जैसे दबाव का सामना कर रहा है, इस नेतृत्व परिवर्तन को तेजी से और कड़े फैसले लेने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की जिम्मेदारी
इन बदलावों से पहले, पूर्व आईआरजीसी कमांडर 71 वर्षीय मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव बनाया गया था। ईरान-इराक युद्ध के दौरान लंबे समय तक आईआरजीसी का नेतृत्व कर चुके रेजाई की यह नियुक्ति सुरक्षा तंत्र में अनुभवी और आक्रामक नेतृत्व को और अधिक धार देने का संकेत देती है। वर्तमान में सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' भी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का मुख्य केंद्र बना हुआ है, जिसके मद्देनजर इन नए बदलावों को युद्धकालीन कमान को अधिक केंद्रीकृत और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


